नई दिल्ली| राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाएं भारी दबाव का सामना कर रही हैं। उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इन संस्थाओं की स्वायत्तता और आजादी को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ का लगाया आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में खरगे ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि “बिना किसी ठोस योजना के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर कई नागरिकों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।” उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ करार देते हुए कहा कि ऐसी गड़बड़ियां भारत के गौरवशाली और पुराने लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती हैं।
‘निष्पक्ष चुनाव नागरिकों का अधिकार’
खरगे ने जोर देकर कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र, निष्पक्ष और निडर माहौल में मतदान करने का संवैधानिक हक है। उन्होंने चुनाव आयोग की ईमानदारी को बहाल करने की मांग करते हुए कहा स्वच्छ वोटर लिस्ट और सभी राजनीतिक दलों को बराबरी का मौका मिलना लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है। चुनाव आयोग की आजादी सुनिश्चित करना इसलिए जरूरी है ताकि लोकतंत्र केवल जिंदा ही न रहे, बल्कि और मजबूत हो।
ऐतिहासिक संदर्भ का दिया हवाला
कांग्रेस अध्यक्ष ने याद दिलाया कि चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने से ठीक एक दिन पहले हुई थी। गौरतलब है कि पिछले 16 वर्षों से इस दिन को देशभर में ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है ताकि नागरिकों को उनके चुनावी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके।





