- फेफड़ों के बाहर भी पनप रहे हैं टीबी के कीटाणु
- बच्चेदानी से लेकर आंतों तक शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है हमला
आगरा। आमतौर पर हम टीबी का मतलब सिर्फ खांसी और बलगम समझते हैं, लेकिन आगरा में सामने आए आंकड़ों ने नींद उड़ा दी है। यहाँ 10 हजार से ज्यादा ऐसे मरीज मिले हैं जिन्हें खांसी तो नहीं थी, पर उनके दिमाग, आंत, बच्चेदानी और हड्डियों में टीबी के कीटाणु घर कर चुके थे।
ये लक्षण हैं खतरे की घंटी
अगर आपको खांसी नहीं है, फिर भी ये समस्याएं हैं तो तुरंत जांच कराएं:
लगातार हल्का बुखार रहना और रात में पसीना आना।
बिना वजह वजन कम होना और अत्यधिक कमजोरी।
भूख न लगना और गर्दन में गांठें (गिल्टी) बनना।
बांझपन की समस्या (बच्चेदानी की टीबी के संकेत)।
मिर्गी के दौरे (दिमाग की टीबी के लक्षण)।
क्या कहते हैं आंकड़े?
स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में आगरा प्रदेश में अव्वल रहा है। पिछले साल 30,000 से अधिक नए मरीज मिले, जिनमें से लगभग 11,000 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के शिकार थे। राहत की बात यह है कि सही समय पर इलाज मिलने से 27,159 मरीज पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं।
डॉक्टर की सलाह:
मधुमेह, कैंसर और किडनी के मरीजों को इसका सबसे ज्यादा खतरा है। अगर बुखार की दवा से आराम नहीं मिल रहा, तो इसे सामान्य बुखार न समझें—यह टीबी हो सकती है।





