राजनीति के पक्के पायदान और सिद्धांतों के धनी—सिद्धार्थ चतुर्वेदी
सियासी सूरमा
सब हैडिंग- सिद्धांतों का सिद्धार्थ: दिल्ली का आलीशान करियर छोड़, आगरा की गलियों में बदलाव की मशाल थामने वाला सूरमा!
- कर्तव्य के आगे फीकी पड़ी कॉरपोरेट नौकरी: जानिए आगरा आप के जिला अध्यक्ष सिद्धार्थ चतुर्वेदी का संघर्ष
- शून्य से शिखर तक का सफर: जूता व्यापार की मार और राजनीति का निखार, ऐसी है सिद्धार्थ की कहानी
- जीआईसी के मैदान से संगठन की कमान तक, एक आम आदमी के नेतृत्व की दास्तान
- अपनों के लिए छोड़ा अपना कल: माता-पिता की सेवा और जनसेवा के लिए राजनीति में उतरे सिद्धार्थ चतुर्वेदी
सियासत के सफर में अक्सर लोग चमक-धमक और रसूख की तलाश करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने सिद्धांतों और पारिवारिक मूल्यों के लिए बड़ी से बड़ी सफलता को दांव पर लगा देते हैं। ताजनगरी में आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष सिद्धार्थ चतुर्वेदी एक ऐसा ही नाम हैं। लेडी लॉयल अस्पताल में जन्मे और राजकीय इंटर कॉलेज की जमीन से संस्कार पाने वाले सिद्धार्थ का जीवन यह सिखाता है कि अपने आप की कीमत तब पता चलती है जब आप अपनी शर्तों पर जीना शुरू करते हैं।
सरकारी स्कूल के अनुभव से मिली जमीनी दृष्टि
सिद्धार्थ चतुर्वेदी के व्यक्तित्व की नींव राजकीय इंटर कॉलेज पंचकुइयां में पड़ी। वहां उन्होंने देखा कि कैसे अभावों के बीच भी बच्चे शिक्षा के लिए संघर्ष करते हैं। यही वह अनुभव था जिसने उन्हें भविष्य में अरविंद केजरीवाल मॉडल और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की विचारधारा से जोड़ा। कॉलेज के दिनों में छात्र संघ पर बैन होने के बावजूद उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस युवा मंच बनाकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
कैरियर बनाम कर्तव्य: दिल की आवाज पर लौटे आगरा
सिद्धार्थ के जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब वे दिल्ली-गुडग़ांव की एक बडी रियल एस्टेट कंपनी में ऊंचे पद पर आसीन थे। उनके पास वहां सफल करियर और सुख-सुविधाएं थीं। लेकिन जब पत्नी और बच्चों के साथ रहने या आगरा में बूढ़े माता-पिता की सेवा करने के बीच चुनाव की बात आई, तो सिद्धार्थ ने बिना देर किए कैरियर पर कर्तव्य को तरजीह दी। वे दिल्ली छोडक़र आगरा वापस आ गिरे। आगरा आकर उन्होंने जूता व्यापार में हाथ आजमाया, नोटबंदी और जीएसटी की मार झेली, कोरोना काल में जीरो पर पहुंचे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। आज वे '॥द्गड्डद्य ह्लद्धद्ग ॥द्गद्गद्यह्य' एनजीओ के माध्यम से गरीबों को जूते बांटने और युवा चतुर्वेदी मंच के अध्यक्ष के रूप में समाज सेवा में जुटे हैं।
आम आदमी पार्टी और संघर्ष की राजनीति
दिल्ली के अन्ना आंदोलन के समय से ही सिद्धार्थ के मन में बदलाव की चिंगारी थी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह को अपना गुरु मानने वाले सिद्धार्थ ने आगरा में आप को मजबूती देने के लिए दिन-रात एक कर दिया। संगठन में काम करते हुए उन्होंने पदमुक्त होने जैसी बेइज्जती भी झेली, लेकिन विचलित नहीं हुए। उनकी निष्ठा और कार्यकुशलता को देखते हुए जून 2022 में पार्टी ने उन्हें जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी। एक राजनेता के लिए संविधान के ज्ञान को अनिवार्य मानते हुए उन्होंने वकालत की डिग्री भी हासिल की, ताकि वे जनता की लड़ाई और मजबूती से लड़ सकें।