गंगा दशहरा पर यमुना-चंबल घाटों पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
- बटेश्वर धाम में भोलेनाथ का जलाभिषेक
- स्नान के दौरान डूबा एक युवक, रेस्क्यू जारी
आगरा। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर सोमवार सुबह से ही आगरा जनपद के यमुना और चंबल नदी घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य किया और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। सबसे अधिक भीड़ तीर्थराज बटेश्वर धाम के यमुना घाटों पर देखने को मिली, जहां दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु यमुना में डुबकी लगाने के बाद प्रसिद्ध ब्रह्मलाल मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक करते नजर आए। हालांकि, भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच स्नान के दौरान एक युवक यमुना नदी में डूब गया, जिसका अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।
बटेश्वर घाटों पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर पुलिसकर्मियों और गोताखोरों की तैनाती की गई थी तथा लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार गहरे पानी में न जाने की चेतावनी दी जा रही थी। इसके बावजूद स्नान के दौरान एक युवक गहरे पानी में समा गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोरों की टीम ने युवक की तलाश में रेस्क्यू (बचाव) अभियान शुरू किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका सुराग नहीं मिल सका था।
पिनाहट के चंबल घाट और आगरा के शहरी घाटों पर भी रही रौनक
बटेश्वर के अलावा पिनाहट ब्लॉक क्षेत्र में चंबल नदी के घाटों पर भी भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। चंबल नदी किनारे भी पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा और लोगों को गहरे पानी से दूर रहने की हिदायत दी जाती रही।
वहीं, आगरा शहर के विभिन्न यमुना घाटों पर भी गंगा दशहरा का खास उल्लास दिखाई दिया। शहर के हाथीघाट, यमुना आरती स्थल, पोइया घाट, बल्केश्वर घाट, दशहरा घाट, रेणुका धाम (रुनकता) और गैलाना स्थित वनखंडी महादेव मंदिर के पास बने घाटों पर श्रद्धालुओं ने यमुना में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। इसके अलावा फतेहाबाद और सदर तहसील क्षेत्रों में जहां-जहां से यमुना नदी गुजरती है, वहां स्थानीय लोग अपने नजदीकी घाटों पर पहुंचकर स्नान-दान करते दिखाई दिए।
घाटों पर चला दान-पुण्य का दौर, बिके तरबूज-खरबूजे
गंगा दशहरा के अवसर पर सभी घाटों पर धार्मिक उत्साह के साथ दान-पुण्य का सिलसिला भी चलता रहा। लोगों ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और नकदी का दान दिया। इस दौरान घाटों पर तरबूज और खरबूजों की बिक्री भी खूब हुई। जगह-जगह सजी दुकानों के कारण घाटों के आसपास पूरी तरह मेले जैसा माहौल नजर आया।