अलनीनो का डबल अटैक! मानसून सुस्त रहने से खेती पर गहराया संकट, सरकार ने बनाया 'प्लान-B'

द हुक: देश के आधे से ज्यादा हिस्से में कमजोर मानसून और अलनीनो के शुरुआती खतरनाक संकेतों के बीच भारत सरकार ने कृषि संकट और महंगाई से निपटने के लिए एक बड़ा रणनीतिक सुरक्षा कवच तैयार किया है।

द इम्पैक्ट: मानसून की सुस्त चाल के कारण देश के लगभग 48% हिस्से में कम और 24% इलाके में अत्यधिक कम बारिश हुई है, जिससे मक्का और धान जैसी फसलों की बुआई प्रभावित होने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने का बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।

द एक्शन: क्या सरकार द्वारा सुरक्षित रखे गए 43 लाख टन रिकॉर्ड दलहन (दालों) के भंडार और कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा देने की इस वैकल्पिक रणनीति से अलनीनो के इस गंभीर संकट का मुकाबला किया जा सकेगा?

आगरा। अलनीनो के प्रभाव के चलते देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी घटकर उनकी कुल क्षमता का महज 27.5 फीसदी ही रह गया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ (FAO) और घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने भी चेतावनी दी है कि इस सुस्ती से खाद्यान्न आपूर्ति और ग्रामीण आय पर सीधा असर पड़ सकता है। आरबीआई (RBI) के अनुसार, मानसून कमजोर होने से घरेलू आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति (महंगाई) पर भी दबाव बढ़ेगा।

प्रशासनिक मुस्तैदी और वैकल्पिक तैयारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने केवल बारिश के भरोसे बैठने के बजाय राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से तुरंत नई फसल योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। दालों की जमाखोरी और कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार के पास इस समय 43 लाख टन का रिकॉर्ड दलहन स्टॉक मौजूद है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में मौसम प्रणालियां मजबूत नहीं हुईं, तो खरीफ सीजन को बचाने के लिए यह सुरक्षित भंडार ही सबसे बड़ा सहारा बनेगा।

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