जानिए लिस्ट में आपका नाम भी तो नहीं शामिल
पटना। बिहार शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के अंतर जिला स्थानांतरण के लिए नया आदेश जारी किया है। शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दो शपथ पत्र अपलोड करना अनिवार्य होगा. गलत जानकारी देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. स्थानांतरण की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित होगी। नए आदेश के तहत 2151 अध्यापकों का स्थानांतरण उनकी प्राथमिकता के मुताबिक होगा।
बिहार में अध्यापकों के ट्रांसफर को लेकर शिक्षा विभाग ने नया नियम निकाला है। अब शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दो शपथ पत्र अपलोड करने होंगे। ऐसा नहीं करने पर उनका स्कूल आवंटन रोक दिया जाएगा। शिक्षकों को यह लिखकर देना होगा कि उनकी दी हुई जानकारी सही है और वे उस जिले में काम करने को तैयार हैं, जो उन्हें दिया गया है। यह नियम सरकारी शिक्षकों के अंतर जिला ट्रांसफर के लिए है।
बिहार में सरकारी शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर नया आदेश जारी किया गया है। जो शिक्षक ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शपथ पत्र नहीं डालेंगे, उनका स्कूल आवंटन रोक दिया जाएगा। शिक्षकों को दो शपथ पत्र अपलोड करने होंगे। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि उनकी दी गई जानकारी सही है। साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि वे आवंटित जिले में काम करने के लिए तैयार हैं। वही अगर कोई टीचर गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
मुजफ्फरपुर के 96 शिक्षकों का ट्रांसफर उनकी पसंद के जिले में हुआ है। राज्य में शिक्षकों का ट्रांसफर सॉफ्टवेयर से किया गया है। मुजफ्फरपुर के 96 शिक्षकों को उनकी पत्नी के कार्यस्थल के आधार पर मनचाहे जिले में भेजा गया है। पूरे राज्य में 2151 शिक्षकों का ट्रांसफर उनकी पसंद के अनुसार हुआ है। शिक्षकों को 10 से 20 अप्रैल के बीच स्कूल मिलेगा।
दूसरे जिले में ट्रांसफर होने वाले शिक्षकों की वरीयता नए जिले में योगदान देने के बाद तय होगी। यह नियम पहले से चले आ रहे नियमों के अनुसार ही होगा। शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि अगर किसी जिले या स्कूल में छात्रों और शिक्षकों का अनुपात ठीक नहीं रहता है, तो शिक्षकों का ट्रांसफर फिर से किया जा सकता है।
स्थानीय निकाय के शिक्षकों को इस ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। अगर किसी स्थानीय निकाय के शिक्षक का ट्रांसफर हो जाता है, तो डीईओ (जिला शिक्षा पदाधिकारी) को इसकी जानकारी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर देनी होगी। जिन शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, या जिन्होंने वित्तीय गड़बड़ी की है, या जिनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हो रही है, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। अगर किसी वजह से ऐसा हो जाता है, तो डीईओ ऐसे शिक्षकों को कार्यमुक्त कर देंगे। भविष्य में शिक्षक तभी ट्रांसफर के लिए योग्य होंगे जब वे सक्षमता परीक्षा पास करेंगे और नए स्कूल में योगदान देंगे।
शिक्षा विभाग के अनुसार, 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों से ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस दौरान पूरे राज्य से 1,90,000 शिक्षकों ने आवेदन किया था। शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया को और भी सख्त बनाने के लिए शपथ पत्र को जरूरी कर दिया है। अब शिक्षकों को अपने ट्रांसफर के लिए सही जानकारी देनी होगी, नहीं तो उनका ट्रांसफर रद्द हो सकता है।