
आगरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर हाउस स्थित माधव भवन का पुनर्निर्माण के बाद गुरुवार को लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम संघ के सह-सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल और विजय गोयल ने दीप प्रज्ज्वलन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि मानव सेवा सबसे बड़ी सेवा है। संघ के कार्यकर्ताओं का बौद्धिक स्तर बढ़ाने को काम होना चाहिए। माधव भवन से ज्ञान की आंधी निकले और संघ दर्शन, सनातन की चिंतन की धारा निकले जिससे विरोधियों को जवाब दिया जा सके।
उन्होंने कहा की मुझे तीन जगह साधु बहुत खराब लगता है। पहला—जब कोई साधु बैंक की लाइन में खड़ा हो। दूसरा—जब कोई साधु रजिस्ट्री करा रहा हो। तीसरा—जब कोई साधु लोकसभा या विधानसभा में बैठा हो। मुझे बहुत शर्म आती है जब कोई भगवा वस्त्र पहना हुआ व्यक्ति संसद या विधानसभा में बैठा दिखाई देता है। चुनाव लड़ना था तो भगवा उतारकर लड़ते। जब एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़नी पड़ती है, तो ये लोग सब कुछ पकड़े बैठे रहते हैं। हम तो बाबा हैं, हमारी आवाज़ कहीं न कहीं बजेगी। इसलिए नाम है बाबा। पाँच साल में नहीं, जब चाहें तब बजेगी।
उन्होंने कहा, “हमारे पास वह ज्ञान, तर्क, सिद्धांत और दर्शन है, जिसके सामने कोई भी माइथोलॉजी या फिलॉसफी टिक नहीं सकती। विश्व में जो कुछ भी है, वह सब हमारे सनातन की जूठन है—चिंतन यदि है तो केवल हमारे पास है।” उन्होंने पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जमीन पर सोना और रेल की पटरी पर रेती करना पड़ता था, लेकिन अब सुंदर भवन बन रहे हैं—यह अच्छी बात है, पर कार्यालय का मतलब केवल साधन जमा करना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की लय-ताल के साथ कार्य आगे बढ़ाना है।
सत्ता पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, संघ से भाजपा में गए लोगों को अधिक हवा लग गई है। सभी समस्या की जड़ सत्ता होती है। बहुत से लोगों की मत भिन्नता होगी। सत्ता तोड़ती है, जोड़ती नहीं। राजसत्ता एक वेश्या की तरह है—आज इसकी है, कल उसकी। सत्ता में आने पर आदमी पागल हो जाता है, चाहता है कि उसका बाप भी नमस्ते करे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि यहां माधव भवन बनते समय वह विद्यार्थी परिषद के कार्यालय से मिट्टी खोदने आते थे। उस समय देश में संघ की शाखा आठ हजार थीं, आज 90 हजार हैं। युग के अनुसार आगे बढ़ना पड़ता है। समय की आवश्यकता है। उसके साथ अपनी भावनाओं को मत बदलना। सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ना। उन्होंने कहा कि सभी पुराने कार्यकर्ताओं के नेतृत्व और आशीर्वाद से संघ आगे बढ़ रहा है।
पहले आगरा विभाग में आगरा महानगर, आगरा जिला, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और कभी-कभी एटा भी शामिल थे। आज यह क्षेत्र चार विभागों में विभाजित हो गया है। मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और अन्य क्षेत्र अलग-अलग इकाइयों के रूप में कार्य कर रहे हैं। पहले कार्य का केंद्र केवल लखनऊ था, फिर लखनऊ और आगरा बने। अब उसी क्षेत्र में सात केंद्र हैं—गोरखपुर, लखनऊ, काशी, कानपुर, आगरा, मेरठ और देहरादून। पहले एक ही प्रांत था, आज सात केंद्र हैं। कार्य बढ़ रहा है और उसके साथ-साथ संघ के स्वयंसेवक भी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा लगभग 48 वर्ष पहले यहाँ माधव भवन बना था। तब हम विद्यार्थी थे और कभी-कभी यहाँ मिट्टी खोदने आते थे। उस समय जिन कार्यकर्ताओं ने मिलकर भवन बनाया, उनमें ओमप्रकाश महाजन, राजकुमार शर्मा, राधेश्याम शर्मा, पूरनचंद अग्रवाल, हीरालाल आदि थे। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिश्रम से यह कार्य खड़ा हुआ। तब देशभर में लगभग आठ हजार शाखाएँ थीं, आज लगभग नब्बे हजार हैं। पहले कार्यालय छोटा था, आज कार्य बढ़ा है, संगठन बढ़ा है, दायित्व बढ़े हैं। इसलिए समय के अनुसार रूप बदलना आवश्यक है। वही माधव भवन है, बस विस्तार हो गया है। संघ एक बड़े सामाजिक परिवर्तन के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। कार्य बढ़ा है, इकाइयाँ बढ़ी हैं, प्रांत बढ़े हैं। पहले आगरा विभाग में आगरा महानगर, आगरा जिला, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और कभी-कभी एटा भी शामिल थे। आज यह क्षेत्र चार विभागों में विभाजित हो गया है। मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और अन्य क्षेत्र अलग-अलग इकाइयों के रूप में कार्य कर रहे हैं। पहले कार्य का केंद्र केवल लखनऊ था, फिर लखनऊ और आगरा बने। अब उसी क्षेत्र में सात केंद्र हैं—गोरखपुर, लखनऊ, काशी, कानपुर, आगरा, मेरठ और देहरादून। पहले एक ही प्रांत था, आज सात केंद्र हैं। कार्य बढ़ रहा है और उसके साथ-साथ संघ के स्वयंसेवक भी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।
संघ धीरे-धीरे समाज जीवन के हर क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं को भेज रहा है—शिक्षा, विज्ञान, इतिहास, विदेश नीति तक नए प्रयोग हो रहे हैं। संघ अब समाज के हर क्षेत्र में कार्यकर्ता भेज रहा है और वैश्विक स्तर पर (ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप आदि) हिंदू समाज की एकता-विविधता का संदेश फैला रहा है।
आज दुनिया हिंदू समाज को समझना चाहती है—परिवार व्यवस्था, पीढ़ियों का साथ रहना, विवाह व्यवस्था, सामाजिक संतुलन। यह जिम्मेदारी आज हमारे ऊपर है। केवल अपना घर नहीं, पूरे हिंदू समाज को संभालना है। यह भवन केवल रहने का स्थान नहीं है। यह समस्त हिंदू समाज की चेतना का केंद्र बने—यही इसकी सच्ची जिम्मेदारी है।





