एडवोकेट अवधेश तोमर ने हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका
जनता की सहूलियत के लिए बने पुल को कभी स्ट्रीट लाइट तो कभी मेंटिनेंस के नाम पर बंद कर दिया जाता है। वही 2027 से यह ओवरब्रिज बन रहा था, जो 9 वर्ष में पूरा हो पाया है। हालांकि जनता के लिए इसे नहीं खोला जा रहा है। इसे लेकर एडवोकेट अवधेश तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। बताया गया है कि नेताओं के आपसी वर्चस्व को लेकर पुल को उद्घाटन अटका हुआ है।
यूपी के ग्वालियर में चल रहा नीडम ओवरब्रिज का मामला अब गहराने लगा है। साथ ही ब्रिज के शुरू होने को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी लगाई गई है। जिस पर जल्दी ही सुनवाई की जाएगी। आपको बता दें कि नीडम ओवरब्रिज का काम बीते 2017 में शुरू हुआ था। लेकिन प्रशासन की लेट लतीफी और लापरवाही के चलते इस ब्रिज को तैयार होने में 9 साल लग गए है।
ब्रिज पूरी तरह तैयार हो चुका है। इसके बाद भी कोई न कोई बहाना बनाकर इस ब्रिज को शुरू होने से पहले रोड़ा लगाया जाता है। वही इसी बात को लेकर जब एडवोकेट अवधेश तोमर द्वारा इस पुल को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई गई है।
एडवोकेट तोमर का मानना है कि पुल पूरी तरह से तैयार हो चुका है। फिर भी इसे शुरू नहीं किया जा रहा है। आखिर प्रशाशन क्यों इस पुल को शुरू करने में देरी लगा रहे है। सभी कारणों का पता लगाने के लिए जनहित याचिका लगाई गई है। तोमर की मानें तो पुल की टेस्टिंग भी पूरी हो चुकी है मगर कुछ राजनीतिक आपसी मतभेदों के कारण उस पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जिसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ रहा है।
नीडम ओवरब्रिज के शुरू होने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था तो सुधरेगी ही साथ ही बाहर से आने वालों को भी फायदा भी होगा। ओवरब्रिज के शुरू होने से शहर के कई मार्गों का जाम कम हो जाएगा। लेकिन राजनीतिक रसूखदारों को आमजन की सुविधा से क्या लेनदेन। क्योंकि उनके आने पर तो रास्ते खाली कर दिए जाते हैं। फिर उन्हें ट्रैफिक में चिलचिलाती धूप में खड़े होने का दर्द क्या पता। शायद उनका राजनीतिक वर्चस्व उन्हें वोट देने वाली जनता से कहीं बड़ा है।
आपको बता दें कि इस ब्रिज को कुछ दिन पहले परेशान जनता ने खुद ही शुरू कर दिया था। इस पर आवागमन भी होने लगा था। लेकिन प्रशासन ने कभी टेस्टिंग तो कभी स्ट्रीट लाइटिंग का नाम लेकर इसे बंद कर दिया था। लेकिन इन सब का विरोध जनता अब करने लगी है। कई समाजसेवी और विपक्ष द्वारा इस ब्रिज को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा जा रहा है।