---Advertisement---

आगरा की अदालत में कंगना रनौत ने माना- किसान आंदोलन और भीख में मिली आजादी जैसे बयान मेरे थे

Published On: January 29, 2026
---Advertisement---

आगरा। थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक राजीव त्यागी द्वारा तैयार की गई पुलिस आख्या को उप निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह ने न्यायालय में प्रस्तुत किया। यह आख्या धारा 225 वन के अंतर्गत न्यायालय के निर्देश पर की गई जांच के आधार पर दाखिल की गई है। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को अभिलेख में लेते हुए दोनों पक्षों की दलीलों के लिए 13 फरवरी 2026 की तिथि नियत कर दी पुलिस जांच के दौरान दर्ज कराए गए अपने बयान में कंगना रनौत ने माना है कि 26 अगस्त 2024 को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक ट्वीट किया था, जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान वहां हत्याएं और बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही थीं और यदि देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो भारत में बांग्लादेश जैसे हालात उत्पन्न हो सकते थे। इस कथन के समर्थन में कंगना ने एबीपी न्यूज़ में 11 सितंबर 2020 को प्रकाशित उस समाचार का हवाला दिया, जिसमें महाराष्ट्र साइबर सेल द्वारा किसान आंदोलन की आड़ में चल रहे खालिस्तान समर्थक नेटवर्क के खुलासे की बात कही गई थी दूसरे विवादित आरोप के संबंध में कंगना रनौत ने अपने बयान में स्वीकार किया कि 16 नवंबर 2021 को उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी राय व्यक्त की थी कि वर्ष 1947 में जो आज़ादी मिली, वह “भीख में मिली आज़ादी” थी और उन्हें वास्तविक आज़ादी का अनुभव वर्ष 2014 के बाद हुआ, जब केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी। कंगना ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, वर्ग या समुदाय का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह टिप्पणी उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध चले स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ में अपनी वैचारिक सोच के आधार पर की थी। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई 1857 से ही प्रारंभ हो चुकी थी, लेकिन अंग्रेजों ने उसे दबा दिया था और वर्ष 2014 के बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से स्वतंत्रता का अनुभव हुआ, जो उनकी निजी सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है कंगना रनौत ने यह भी कहा कि आज़ादी को लेकर उनकी धारणा अलग है और उसी को उन्होंने सार्वजनिक मंच पर व्यक्त किया है। उनका कहना है कि उनके बयानों की गलत व्याख्या की गई और उनके कथनों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया। पुलिस आख्या में इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए कोर्ट को अवगत कराया गया है आज की सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुधा प्रधान, स्थानीय अधिवक्ता विवेक शर्मा सहित कई अधिवक्ता मौजूद थे, जबकि वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के नेतृत्व में सुखबीर सिंह चौहान, राजीव कुमार सिंह, बीएस फौजदार और प्रीति कुमारी समेत आधा दर्जन से अधिक वकील अदालत में बहस के लिए तैयार थे। हालांकि, न्यायालय ने आज किसी भी पक्ष की दलील नहीं सुनी और सीधे तौर पर बहस के लिए 13 फरवरी 2026 की तारीख तय कर दी कंगना रनौत द्वारा बयानों की स्वीकारोक्ति के बाद यह मामला अब और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक ओर यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे सामाजिक और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। अब 13 फरवरी को होने वाली बहस में यह तय होगा कि कंगना के बयान कानून की कसौटी पर किस रूप में टिकते हैं।

---Advertisement---

Leave a Comment