छात्र आंदोलन की भट्टी में तपे ग्रामीण विकास के प्रखर संवाहक मोहित सोलंकी
सियासी संघर्ष
- सिर फटा मगर नहीं झुका राष्ट्रवाद का झंडा टीएनएफ टुडे पर पढि़ए मोहित सोलंकी के संघर्ष की अनकही गाथा
- प्रलोभन के दौर में संगठन के प्रति अटूट निष्ठा बेचने से इंकार कर शुचिता की मिसाल बने मोहित सोलंकी
- सेंट जॉन्स कॉलेज से जिला पंचायत सदन तक किसान पुत्र मोहित सोलंकी का बेदाग और प्रेरणादायी सफर
- ब्रांड वैल्यू से अलग जमीन पर पसीना बहाने वाला वह युवा चेहरा जो बन सकता है शीर्ष नेतृत्व का मजबूत विकल्प
समकालीन राजनीति के फलक पर जब अवसरवाद और शॉर्टकट का बोलबाला बड़ रहा है तब जमीनी संघर्ष वैचारिक दृढ़ता और छात्र आंदोलन की भट्टी में तपकर निखरने वाले युवा नेतृत्व का उभार अत्यंत सुखद और आशावादी संकेत देता है। ताजनगरी आगरा की देहात राजनीति में अपनी निर्भीक कार्यशैली और जन सरोकारों के प्रति अटूट निष्ठा के कारण एक विशिष्ट पहचान बनाने वाले युवा नेता मोहित सोलंकी उर्फ घनश्याम इसका सबसे जीवंत और प्रखर उदाहरण हैं। अछनेरा क्षेत्र के एक बेहद साधारण और विशुद्ध किसान परिवार से निकलकर जिला पंचायत सदन तक का सफर तय करने वाले मोहित सोलंकी का पूरा जीवन गांव गरीब किसान मजदूर और आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने की एक गौरवमयी गाथा है। वे केवल एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं बल्कि वे आगरा के युवाओं और किसानों की हक की लड़ाई लडऩे वाले एक अदम्य और निर्भीक योद्धा हैं।
सेंट जॉन्स कॉलेज से विश्वविद्यालय तक छात्र राजनीति का बुलंद झंडा
मोहित सोलंकी जी के राजनैतिक जीवन की नींव उनके छात्र जीवन के दौरान ही पड़ गई थी जब उन्होंने ऐतिहासिक सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा में कदम रखा था। राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से प्रेरित होकर वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से जुड़े और अपनी अद्भुत संगठन क्षमता के बल पर कॉलेज इकाई के अध्यक्ष बने। इसके बाद डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के दौरान वे छात्र राजनीति के सबसे प्रमुख और जुझारू चेहरे के रूप में स्थापित हुए। उस दौर में प्रदेश में वैचारिक रूप से धुर विरोधी दलों की सरकारें थीं और शासन प्रशासन का रुख अत्यंत दमनकारी था लेकिन मोहित सोलंकी ने छात्र हितों से कभी कोई समझौता नहीं किया। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की समस्याओं के निवारण और उनके अधिकारों के लिए उन्होंने अनगिनत कड़े आंदोलन किए और भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र से सीधी और तीखी तकरार मोल ली। विद्यार्थी परिषद में जिला सह संयोजक की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने छात्र संगठन का झंडा हमेशा पूरे स्वाभिमान के साथ बुलंद रखा।
पुलिस की लाठियों से नहीं डरे और सिर फटने पर भी जारी रखा आंदोलन
मोहित सोलंकी के राजनैतिक जीवन में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव का वह दौर आज भी आगरा की राजनैतिक चर्चाओं के केंद्र में रहता है। छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जब उन्होंने चुनाव को लेकर बिगुल फूंका तो तत्कालीन सत्ता के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने दमन चक्र चलाया। आंदोलन के दौरान पुलिस के साथ हुई भयंकर और तीखी तकरार में पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां भांजी जिसमें मोहित सोलंकी जी का सिर गंभीर रूप से फट गया और वे लहूलुहान हो गए। लेकिन इस प्राणघातक हमले के बाद भी उनके हौसले तनिक भी नहीं डगमगाए और उन्होंने अस्पताल से लेकर सडक़ तक अपना छात्र आंदोलन पूरी दृढ़ता से जारी रखा। उनके इसी अदम्य साहस और वैचारिक निष्ठा को देखते हुए विद्यार्थी परिषद ने उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सम्मानित सदस्य बनाया। उन्होंने परिषद के कार्य को केवल शहरों तक सीमित न रखकर गांव देहात के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाया और ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों के लिए भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह तथा संगठन के अभ्यास वर्गों का ऐतिहासिक आयोजन करके ग्रामीण युवाओं में राष्ट्रवाद की अलख जगाई।
कम उम्र के जिला पंचायत सदस्य और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा
वर्ष 2021 में भारतीय जनता पार्टी ने मोहित सोलंकी जी के जमीनी संघर्ष और लोकप्रियता पर भरोसा जताते हुए उन्हें जिला पंचायत सदस्य का आधिकारिक टिकट दिया। जनता के अपार स्नेह और समर्थन के बल पर वे भारी मतों से विजयी हुए और आगरा के इतिहास में सबसे कम उम्र के जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होने का गौरव प्राप्त किया। उनके कुशल विजन को देखते हुए उन्हें जिला पंचायत की अत्यंत महत्वपूर्ण जिला योजना समिति का सम्मानित सदस्य भी मनोनीत किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान जब राजनैतिक गलियारों में प्रलोभन और खरीद फरोख्त का खुला खेल चल रहा था तब मोहित सोलंकी जी ने अपनी उच्च नैतिक परंपराओं और संगठन के प्रति सच्ची निष्ठा का परिचय दिया। उन्होंने अपने वोट की सौदेबाज़ी करने वाले तत्वों को ठुकराते हुए पार्टी के आदेश पर पूरी ईमानदारी से मतदान किया जो उनके चरित्र की शुचिता को दर्शाता है।
ग्रामीण विकास का बीड़ा और शीर्ष नेतृत्व के लिए एक योग्य विकल्प
आज मोहित सोलंकी अपने अछनेरा और देहात क्षेत्र में गांव गरीब और किसान के सर्वांगीण विकास का मजबूत बीड़ा उठाए हुए हैं। ग्रामीण अंचलों में सडक़ों की स्थिति सुधारना पेयजल की व्यवस्था करना और गरीब किसानों की समस्याओं को सदन में मुखरता से उठाना उनकी स्थाई दिनचर्या बन चुका है। वे हर जरूरतमंद व्यक्ति के काम कराने के लिए आधी रात को भी शासन प्रशासन से संघर्ष करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। एक साधारण किसान पुत्र होने के कारण वे ग्रामीण परिवेश की बारीकियों और मजदूर वर्ग की पीड़ा को बहुत गहराई से समझते हैं। टीएनएफ टुडे मोहित सोलंकी के इस दीर्घकालिक सियासी संघर्ष और अटूट निष्ठा को सलाम करता है। वर्तमान दौर में जब भारतीय जनता पार्टी को जमीन पर पसीना बहाने वाले चरित्रवान और वफादार युवा चेहरों की महती आवश्यकता है तब मोहित सोलंकी जैसा तपा हुआ और जनाधार वाला युवा नेता शीर्ष नेतृत्व के लिए भविष्य की बड़ी राजनीति का एक अत्यंत सुयोग्य विश्वसनीय और सामथ्र्यवान विकल्प सिद्ध हो सकता है।