RSS का संगठनात्मक बदलाव: प्रांत व्यवस्था की जगह अब संभाग आधारित प्रणाली अपनाएगा संघ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है। 10 से 12 जुलाई तक कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित होने वाली 'अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक' में संघ मौजूदा 'प्रांत आधारित व्यवस्था' को बदलकर 'संभाग आधारित प्रणाली' को लागू करने की कार्ययोजना पर मुहर लगाएगा।
क्या होगा संगठनात्मक ढांचा?
संघ के इस नए मॉडल से संबंधित मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
वर्तमान में संघ का कार्य देशभर के 46 प्रांतों के माध्यम से संचालित होता है, जिसे बदलकर अब 85 संभागों को संघ की प्रमुख इकाई बनाया जाएगा।
नई व्यवस्था में प्रत्येक प्रांत के अंतर्गत दो से तीन संभाग होंगे।
संगठन में 'संभाग प्रमुख' को अब 'संभाग प्रचारक' के रूप में जाना जाएगा।
प्रांत स्तर पर 'प्रांत प्रचारक' का पद समाप्त कर दिया जाएगा और राज्य स्तर पर 'राज्य प्रचारक' मुख्य पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे, जिनकी अपनी अलग टीम होगी।
क्यों किया जा रहा है यह बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया एक व्यापक पुनर्गठन है:
इस व्यवस्था से संगठन की कार्यक्षमता और पहुंच को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
छोटे संगठनात्मक क्षेत्र होने से कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय बेहतर होगा और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को लागू करना आसान हो जाएगा।
निर्णय लेने की प्रक्रिया अब अधिक विकेंद्रीकृत होगी और कार्यक्रमों की क्रियान्वयन गति में तेजी आएगी।
बेलगावी बैठक की अहमियत
कर्नाटक के बेलगावी में होने वाली इस बैठक में संघ का सर्वोच्च नेतृत्व, जिसमें सरसंघचालक और सरकार्यवाह शामिल हैं, मौजूद रहेंगे। इस बैठक में देशभर के प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और संघ प्रेरित 32 विविध संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री भाग लेंगे। इसमें शताब्दी वर्ष के आयोजनों और आगामी दशकों की कार्यप्रणाली को अंतिम रूप दिया जाएगा।