वांगचुक के अनशन पर गरमाई सियासत: AIMIM नेता शादाब चौहान का PM मोदी पर तीखा हमला, कहा- 'विदेश घूमने का समय है, लेकिन देश के नौजवानों के लिए नहीं'
परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के आमरण अनशन को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा गई है. इस संवेदनशील मुद्दे पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के फायरब्रांड नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने केंद्र की मोदी सरकार पर बेहद तीखा और करारा हमला बोला है.
शादाब चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों पर तंज कसते हुए सरकार की नीतियां और उनके अहंकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
अहंकार में डूबी है सरकार: शादाब चौहान
AIMIM नेता शादाब चौहान ने सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य और सरकार की चुप्पी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास दुनिया भर में विदेश घूमने का पूरा समय है, लेकिन देश के नौजवानों और उनके भविष्य की चिंता करने का वक्त नहीं है. सरकार पूरी तरह से अहंकार में डूबी हुई है."
चौहान ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना किसी रिसर्च और जमीनी हकीकत को जाने आनन-फानन में कानून और नीतियां लेकर आती है. जब वे नीतियां फेल हो जाती हैं या उनमें बड़े घोटाले (जैसे पेपर लीक) सामने आते हैं, तो सरकार अपनी नाकामियों को स्वीकार करने के बजाय उसे छिपाने के लिए भारी अहंकार का प्रदर्शन करती है.
सोनम वांगचुक का अनशन और विपक्ष का साथ
ज्ञात हो कि नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधलियों के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर लगातार आमरण अनशन पर बैठे हैं. उनके इस आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का चौतरफा समर्थन मिल रहा है.
शादाब चौहान ने साफ किया कि देश का युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. एक तरफ छात्र सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं और अनशन पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोग मौन साधे हुए हैं.
2027 के दंगल से पहले विपक्ष का बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी मोड में आ चुकी पार्टियां अब पेपर लीक और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरने के मूड में हैं. AIMIM का यह हमला साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ छात्रों तक सीमित न रहकर एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेने जा रहा है.