‘भारत को तोड़ने वालों की खैर नहीं!’ मोहन भागवत की हुंकार, बोले- सत्ता बदलने से नहीं बदलेंगे हालात
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में भारत की प्रगति, सामाजिक एकता और देश के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की बढ़ती ताकत से परेशान कुछ शक्तियां देश और संघ को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी।
संघ के 101वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि केवल सरकार बदलने से देश की समस्याएं अपने आप खत्म नहीं होतीं। पहले भी सत्ता परिवर्तन से हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया और आज भी सिर्फ सरकार बदलने को समाधान मानना सही नहीं है। भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय मर्यादाओं को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने भारत को भी ऐसी परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ दशकों में अपनी नीतियों और विकास के जरिए आगे बढ़ा है। उनके मुताबिक, कुछ विरोधी ताकतें इस प्रगति को बाधित करना चाहती हैं और देश के भीतर भी कुछ लोग इन प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों को जरूरी बताते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि जनता को अपनी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन विरोध का इस्तेमाल समाज में नफरत और विभाजन फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक नेताओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों से संयम बरतने की अपील की। भागवत ने जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में संविधान, कानून और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि राजनीतिक उकसावे से होने वाले प्रदर्शन सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं और आम जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं।