SIR विरोध पर जेल में बंद सौरव-अशुतोष ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

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नई दिल्ली। SIR के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की है। हालांकि, दशहरा अवकाश के कारण अदालत में इस सप्ताह सुनवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के गेट पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। दोनों पहले पांच दिन और फिर दो दिन की बढ़ाई गई हिरासत में रहे। उनकी मौजूदा हिरासत बुधवार को समाप्त हो रही है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दो दिन की अतिरिक्त हिरासत कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी और इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जरूरी जमानती दस्तावेज कई बार जमा करने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हुई।दोनों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 140 के तहत जमानतदारों की जांच और उन्हें अस्वीकार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर स्वतंत्रता सीमित नहीं की जा सकती; इसके लिए संभावित अशांति और वास्तविक खतरे के बीच ठोस संबंध होना जरूरी है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटना से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। बुधवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट उनकी हिरासत बढ़ाने या रिहाई पर फैसला ले सकते हैं। यदि दोनों को रिहा कर दिया जाता है, तो हाईकोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

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