सिंधु जल संधि: पाकिस्तान की गीदड़भभकी
द हुक: दोनों पड़ोसी देशों के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान सरकार के मंत्रियों ने भारत के खिलाफ एक बार फिर बेहद अमर्यादित और तीखी बयानबाजी की है।
द इम्पैक्ट: पाकिस्तानी मंत्रियों मुसादिक मलिक और अताउल्लाह तरार ने भारत को विधिक चेतावनी देने के लहजे में भड़काऊ बातें कही हैं, जिससे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में कड़वाहट और बढ़ सकती है।
द एक्शन: भारत द्वारा संधि की समीक्षा के लिए भेजे गए विधिक नोटिस के बाद बौखलाए इस्लामाबाद के इस आक्रामक रुख पर क्या नई दिल्ली सख्त कूटनीतिक जवाब देगी?
इस्लामाबाद। सीमा पार आंतरिक और आर्थिक संकटों से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब भारत के साथ चल रहे पानी के विधिक विवाद को लेकर नया मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तानी मीडिया और आधिकारिक सूत्रों से आई खबरों के मुताबिक, वहां की सरकार के कैबिनेट मंत्रियों ने सिंधु जल समझौते के विधिक प्रावधानों को लेकर भारत के खिलाफ बेहद तीखे और अनाप-शनाप बयान दिए हैं। पाकिस्तानी नेताओं ने कहा कि वे देश के पानी के विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं और समझौते में किसी भी एकतरफा विधिक बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे।
दरअसल, भारत सरकार ने पिछले दिनों सिंधु जल संधि की विधिक समीक्षा और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार उसमें जरूरी संशोधन करने के लिए पाकिस्तान को एक आधिकारिक विधिक नोटिस जारी किया था। भारत का रुख है कि दशकों पुरानी यह संधि वर्तमान समय की विधिक और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। इसी विधिक कदम से बौखलाहट में आकर पाकिस्तानी नेतृत्व अब वैश्विक मंचों पर हाय-तौबा मचाने और गीदड़भभकी देने का प्रयास कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर भारत के खिलाफ इस तरह के गैर-विधिक और आक्रामक बयानों का सहारा लेता रहाdd है।