अब करियर का मतलब सिर्फ 9 से 5 की डेस्क जॉब या सरकारी कुर्सी नहीं रह गया है। आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z ने सफलता के पुराने पैमानों को बदलकर रख दिया है। डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ‘भेड़चाल’ छोड़ अब युवा उन राहों पर निकल पड़े हैं जहाँ पहचान, आजादी और मानसिक शांति साथ-साथ मिले।
क्यों बदल रही है सोच?
पुरानी पीढ़ियों के लिए नौकरी का मतलब ‘सुरक्षा’ था, लेकिन Gen Z के लिए इसका मतलब ‘संतुष्टि’ है। इंटरनेट और डिजिटल क्रांति ने उनके लिए दुनिया के दरवाजे खोल दिए हैं, जहाँ वे अपने टैलेंट को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर बेच रहे हैं। “सफलता का पैमाना अब डिग्री नहीं, बल्कि टैलेंट और क्रिएटिविटी है। हम केवल काम के लिए नहीं जीते, बल्कि जीने के लिए काम करते हैं।”
करियर ऑप्शंस: जहाँ पैसा और पहचान दोनों हैं-
आज के युवा रटे-रटाए सिलेबस के बजाय इन स्किल्स पर दांव लगा रहे हैं जैसे:-
क्रिएटिव इकोनॉमी: कंटेंट क्रिएशन (यूट्यूब/इंस्टाग्राम), पॉडकास्टिंग और ट्रैवल ब्लॉगिंग।
टेक वर्ल्ड: AI डेवलपमेंट, डेटा साइंस, UX/UI डिजाइनिंग और ऐप डेवलपमेंट।
न्यू-एज सर्विसेज: डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और गेमिंग।
सस्टेनेबल चॉइस: फैशन फोटोग्राफी और ईको-फ्रेंडली बिजनेस।
वर्क-लाइफ बैलेंस सबसे ऊपर
Gen Z के लिए मेंटल हेल्थ से समझौता करना नामुमकिन है। वे ऐसी नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहाँ दफ्तर की चारदीवारी से आजादी और ‘वर्क फ्रॉम एनीव्हेयर’ का विकल्प। काम ऐसा हो जिससे समाज या पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़े। जहाँ हर दिन कुछ नया सीखने को मिले, न कि सिर्फ फाइलों का बोझ।





