सेवा के संस्कार और भाजपा के मीडिया चाणक्य—रोहित कत्याल
सियासी सूरमा
सियासत के समर में कुछ योद्धा ऐसे होते हैं जो मंच पर कम और मोर्चे पर ज्यादा दिखाई देते हैं। आगरा भाजपा के कर्मठ सिपाही और महानगर मीडिया प्रभारी रोहित कत्याल एक ऐसा ही नाम हैं, जिन्होंने पद की लालसा त्यागकर केवल कमल को अपना प्रत्याशी माना। विभाजन की विभीषिका झेलकर पाकिस्तान से आए एक शरणार्थी परिवार की तीसरी पीड़ी के रोहित कत्याल ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से आज ताजनगरी की राजनीति और समाजसेवा में एक खास मुकाम हासिल किया है।
विभाजन का दर्द और संस्कारों की विरासत
रोहित के दादा स्वर्गीय जसवंत राय कत्याल 1947 में अपनी मां को कंधे पर बैठाकर पाकिस्तान से आगरा आए थे। एक रिफ्यूजी के रूप में शून्य से शुरुआत करने वाले इस परिवार ने मेहनत से ट्रांसपोर्ट का बड़ा कारोबार खड़ा किया। दादा के साथ बचपन में मंदिर जाना और गरीबों की सेवा करना रोहित के संस्कारों में रच-बस गया। कॉन्वेंट स्कूल के मेधावी छात्र रहे रोहित ने सेंट जॉन्स और आगरा कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की, लेकिन उनका असली मन हमेशा जरूरतमंदों की सेवा में ही रमा रहा।
कोरोना काल का राशन बैंक और 30 बार रक्तदान
रोहित कत्याल का असली चरित्र कोरोना महामारी के दौरान निखरकर सामने आया। जब लोग घरों में कैद थे, तब रोहित अपनी स्कूटी पर रात-रात भर घूमकर लगभग 1200 परिवारों को राशन और ऑक्सीजन पहुंचा रहे थे। पिता स्वर्गीय अवतार कृष्ण कत्याल की याद में प्याऊ लगवाना हो, 30 से अधिक बार रक्तदान करना हो या गरीब कन्याओं का विवाह—रोहित आज आगरा के समाजसेवियों की पहली पसंद हैं। पंजाबी सभा के माध्यम से उन्होंने सेवा का जो नेटवर्क ख?ा किया, उसने हजारों लोगों की जान बचाई।
मीडिया प्रबंधन के जादूगर और भाजपा के कर्मवीर
2022 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले रोहित कत्याल ने अपनी कुशल मीडिया रणनीति से भाजपा नेतृत्व को हैरान कर दिया। 2022 विधानसभा चुनाव हों, महापौर चुनाव हो या 2024 का लोकसभा चुनाव—रोहित ने एक टांग पर खड़े रहकर मीडिया प्रबंधन संभाला। आगरा ही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा में भी उन्होंने मीडिया मैनेजमेंट की जिम्मेदारी को जुनून के साथ निभाया। वर्तमान महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता के कार्यकाल में वे पार्टी की हर प्रेस वार्ता और अभियान की रीढ़ बनकर उभरे हैं।