एड्स-लाइलाज है- बचाव ही उपचार है
गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का हो जाना।
लगातार कई-कई हफ्ते अतिसार घटते जाना।
लगातार कई-कई हफ्ते बुखार रहना।
एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्योंकि उनसे पैदा होने वाले शिशु को यह रोग लग सकता है।
त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले ददोरे/चकते हो जाना।
मूंह में घाव हो जाना।
रक्त की आवश्यकता होने पर अनजान व्यक्ति का रक्त न लें, और सुरक्षित रक्त के लिए एच.आई.वी. जांच किया रक्त ही ग्रहण करें