लूटपाट, मर्डर और किडनैपिंग पर 85 प्रतिशत की रोकधाम
यूपी l सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार हुए हैं, जिससे अपराध दर में 85 प्रतिशत तक गिरावट आई है। माफिया और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ 142 अरब रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। हजारों की गिरफ्तारी हुई है।
उत्तर प्रदेश में अपराध कारित करने वाले अपराधियों पर न सिर्फ कार्रवाई की जा रही है, बल्कि उनके अवैध साम्राज्य को भी नेस्तेनाबूत किया जा रहा है। यही वजह है कि सौ बार सोचने के बाद अपराधी कोई कदम उठा रहे हैं, लेकिन फिर भी घटनाएं अभी भी घट रही है। वहीं सरकार के दावों की माने तो सीएम योगी के नेतृत्व में पिछले 8 सालों में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। डैकती, लूट, दंगा, हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में 85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस तरह योगी सरकार में माफिया और गुंडागर्दी पर शिकंजा कसता जा रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड की माने तो डकैती की घटनाओं में 2016 की तुलना में 84.41 प्रतिशत की कमी भी आई है। जबकि लूट के मामले 77.43 फीसदी तक कम हुए हैं। वही इसी तरह अपहरण, दहेज हत्या और बलात्कार की घटनाओं में भी भारी कमी देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं, योगी सरकार ने प्रदेश के माफियाओं, गैंगस्टरों और भू-माफिया पर बड़े पैमाने पर कार्यवाही भी की है।
भू-माफिया की 142 अरब रुपये से अधिक की चल-अचल अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। वहीं, 68 माफिया और उनके करीब डेढ़ हजार सहयोगियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 617 अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। इसके अलावा 752 पर गैंगस्टर एक्ट लागू किया गया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस की सक्रियता और सीसीटीवी सर्विलांस जैसी आधुनिक तकनीकों ने अपराधियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तरह सूबे की योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश न केवल विकास के मामले में आगे बढ़ा है, बल्कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी एक नई मिसाल कायम की है। पुलिस प्रशासन की सक्रियता, तकनीकी उन्नयन और सख्त कानूनों ने अपराधियों को मिट्टी में मिला दिया गया है।
योगी सरकार में यूपी का हर नागरिक सुरक्षित महसूस करता है। ये योगी सरकार की एक तरह से सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि 2017 में योगी सरकार बनने से पहले उत्त्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था विपक्षी दलों का मुद्दा होता था। इसी मुद्दे को भुनाकर भाजपा ने यूपी की सत्ता में वापसी की थी और 2022 विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।