बंदूक छोड़ रेड कार्पेट पर उतरीं पूर्व महिला माओवादी: रायपुर के ट्राइबल फैशन शो में रैंप वॉक कर पेश की बस्तर के बदलाव की नई तस्वीर

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कभी छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में हाथों में बंदूक थामकर भटकने वाली पूर्व महिला माओवादी अब एक नए और आत्मविश्वासी रूप में सामने आई हैं। रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर एक विशेष ट्राइबल फैशन शो का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व महिला माओवादियों ने हाथ से बुने परिधान पहनकर रैंप वॉक किया।

जंगलों की खामोशी और गोलियों की गूंज के बीच जिंदगी बिताने वाली इन महिलाओं का मंच पर तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत हुआ। यह आयोजन केवल एक फैशन शो नहीं था, बल्कि बस्तर में भय और हिंसा से मुख्यधारा व शांति की ओर बढ़ते कदमों का एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।

सोशल मीडिया पर मिली सराहना, बदलाव की नई बयार

इस आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे बस्तर के बदलते माहौल की एक ऐतिहासिक तस्वीर बताया। कई लोगों ने इसे महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण का उदाहरण माना।

यह बदलाव केवल फैशन शो तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के जनजीवन में धरातल पर दिख रहा है:

खेल का मैदान: 'बस्तर ओलंपिक 2025' में 3.91 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिसमें 700 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली और हिंसा से प्रभावित ग्रामीण भी शामिल हुए।

शिक्षा की वापसी: माओवादियों द्वारा बंद या ध्वस्त कराए गए कई स्कूल फिर से खोल दिए गए हैं। क्षेत्र में 259 एकलव्य मॉडल स्कूल, 46 आईटीआई (ITI) और 49 कौशल विकास केंद्र काम कर रहे हैं।

बुनियादी सुविधाएं: 'नियद नेल्लानार' योजना के तहत सुरक्षा बलों के कैंपों के जरिए दूर-दराज के गांवों तक राशन, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के 70 से अधिक गांवों तक पहली बार बिजली पहुंची है।

कनेक्टिविटी और विकास पर जोर

बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों और 1,300 से अधिक मोबाइल टावरों का निर्माण कराया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही, बस्तर संभाग के 92 से अधिक ऐसे दूरस्थ गांवों में स्वतंत्रता के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर में सड़क निर्माण और विकास कार्यों के मानकों में विशेष छूट की मांग की है, ताकि दशकों की हिंसा से बाहर निकल रहे इस क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित किया जा सके।

पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व माओवादियों को घर, जमीन, आर्थिक सहायता और रोजगार देकर एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है।

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