क्या भारत में इथेनॉल के कारण बढ़ रही हैं चीनी की कीमतें? जानिए क्या है पूरी वजह

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भारत में पिछले कुछ महीनों से चीनी के दामों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, केवल एक महीने में ही देश में चीनी की कीमतों में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है.

कितनी बढ़ गई हैं कीमतें?

भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अगस्त को खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 55.7 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई. जबकि एक महीने पहले यही कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी. वहीं, 20 अगस्त, 2025 को चीनी की कीमत 46.3 रुपये प्रति किलोग्राम थी. बाजार के जानकारों का मानना है कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे स्तर पर नहीं पहुंचे हैं.

दाम बढ़ने के मुख्य कारण

कमजोर मॉनसून: जानकारों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव की वजह से मॉनसून कमजोर रहा, जिससे चीनी की कीमतें प्रभावित हुई हैं. हालांकि, केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में गन्ने की बुआई पिछले साल के लगभग बराबर ही रही है, जो पांच वर्षों के औसत से करीब चार लाख हेक्टेयर ज्यादा है.

इथेनॉल और उत्पादन में अंतर: चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए इथेनॉल को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष केतन पटेल के अनुसार, 2025-26 के चीनी वर्ष में देश में चीनी का उत्पादन 3.2 करोड़ टन (32 अरब किलोग्राम) रहने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन असल उत्पादन गिरकर करीब 3 करोड़ टन (30 अरब किलोग्राम) ही रह गया.

सरकार ने उठाए सख्त कदम

त्योहारी सीजन (जन्माष्टमी से शुरू होने वाला समय) के नजदीक आने के कारण सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सक्रिय हो गई है. इसके तहत सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है और साथ ही थोक व्यापारियों के पास रखे जाने वाले चीनी के स्टॉक पर भी सीमा (स्टॉक लिमिट) तय कर दी है.

दुनिया में चीनी उत्पादन के मामले में ब्राजील के बाद भारत दूसरे स्थान पर है और देश में गन्ने के रस से चीनी बनाने वाली कुल 703 मिलें हैं, जिनमें 335 प्राइवेट, 325 सहकारी और 43 सरकारी चीनी मिलें शामिल हैं.)

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