आगरा में ‘कंठोष्ठ्य लोकगीतोत्सव’ संपन्न: प्रो. उमापति दीक्षित बोले— विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को जीवंत रखने का एकमात्र उपाय हैं लोकगीत

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देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था आगरा के तत्वावधान में निखिल बुक कैफे, भावना मल्टीप्लैक्स, सिकंदरा-बोदला रोड पर "हृदयंगम्~१०४" के रसानंद के तहत भव्य कंठोष्ठ्य लोकगीतोत्सव का आयोजन बड़े ही गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

लोकगीत हमारी विरासत का प्रामाणिक दस्तावेज: कार्यक्रम के सभापति प्रो. उमापति दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को जीवंत रखने का एकमात्र उपाय लोकगीत हैं, और आज के साहित्यकारों को पुनः लोकगीतों के लेखन में जुटना होगा।

दीप प्रज्ज्वलन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार धीरज शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में लोकगीत लेखन की नितांत आवश्यकता है, क्योंकि ये हमारी देश की विरासत के प्रामाणिक दस्तावेज हैं जिन्हें बचाए रखना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के संरक्षक कवि डॉ. यशोयश ने कहा कि लोकगीत पुरातन काल से भारत की माटी को महकाते रहे हैं और ये सौंधी-सौंधी सुगंध के स्रोत हैं। सभाअध्यक्षा डॉ. रेखा कक्कड़ ने कहा कि लोकगीत हमारी ब्रज संस्कृति के विशुद्ध परिचायक हैं। वहीं, कवि सम्राट डॉ. राजेन्द्र मिलन ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि लोकगीत लेखन साहित्य जगत को ऑक्सीजन देने का काम करते हैं। मुख्य वक्ता डॉ. ब्रज बिहारी लाल 'बिरजू' ने ब्रजरज से ओतप्रोत स्थानीय रसिया और मल्हार के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि विशिष्ट अतिथि कंठकोकिला निशिराज ने लोकगीत और लोकसंगीत की जुगलबंदी को संस्कृति का संवाहक बताया।

सुमधुर काव्य-पाठ और संचालन

कार्यक्रम का स्वागत, सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक अंकुर अनजान ने किया, जबकि कार्यक्रम का गौरवपूर्ण संचालन कवयित्री पद्मावती ने निभाया।

इस दौरान कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रचनाकारों ने सुमधुर काव्य-पाठ कर लोकगीतोत्सव को हर्षोल्लास से भर दिया। काव्य-पाठ करने वालों में डॉ. यशोयश, अंकुर अनजान, डॉ. राजेन्द्र मिलन, डॉ. ब्रज बिहारी लाल 'बिरजू', रमा वर्मा, डॉ. सुषमा सिंह, आरती शर्मा, डॉ. सुकेसिनी दीक्षित, डॉ. राजीव शर्मा 'निस्पृह', रामेन्द्र कुमार शर्मा, प्रभुदत्त उपाध्याय, उमाशंकर पाराशर, अशोक गोयल, राम अवतार शर्मा, इंदल सिंह 'इंदु', विनय बंसल, डॉ. असीम आनंद, रामेश्वर दयाल और संजय दीक्षित प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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