‘तैयारी जीत की’: नवाचार और रुचिपूर्ण शिक्षण से उच्च प्राथमिक विद्यालय नैनाना जाट में बढ़ा बच्चों का उत्साह, अभिभावकों का बढ़ा विश्वास

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समाज में सकारात्मक बदलाव के सबसे प्रभावी माध्यम और प्रत्येक बच्चे के मौलिक अधिकार—शिक्षा—को आधार बनाकर, उच्च प्राथमिक विद्यालय नैनाना जाट (कम्पोजिट), बरौली अहीर, आगरा में शिक्षा की एक नई तस्वीर पेश की जा रही है। यहाँ बच्चों को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, बल्कि एक ऐसा रुचिपूर्ण और आनंदमय वातावरण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे विद्यालय के प्रति बच्चों का उत्साह निरंतर बढ़ रहा है।

शिक्षक का दायित्व: भविष्य के लिए तैयार करना

विद्यालय में कार्यरत सहायक अध्यापिका का दृढ़ विश्वास है कि एक शिक्षक का दायित्व केवल निर्धारित पाठ्यक्रम को पूरा करना मात्र नहीं है, बल्कि बच्चों को आने वाली चुनौतियों और भविष्य के लिए तैयार करना भी है। इसी सोच के साथ, विद्यालय में बच्चों को रटने के बजाय 'खेल-खेल में सीखने', प्रश्न पूछने, अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा को व्यक्त करने और कल्पनाशक्ति को विकसित करने के भरपूर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

नवाचार बना सीखने का आधार

शिक्षा को बोझिल बनाने के स्थान पर उसे रोचक व सुगम बनाने के लिए शिक्षण प्रक्रिया में विभिन्न नवाचारों और गतिविधियों को शामिल किया गया है। 'मीना मंच', 'करके सीखो' (Learning by Doing), 'बैंड टीम' और स्मार्ट सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसी आधुनिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा और रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का मंच मिल रहा है।

शिक्षिका का निरंतर प्रयास रहता है कि जब बच्चा दिन भर की पढ़ाई के बाद विद्यालय से घर जाए, तो उसके मन में कुछ नए प्रश्न और जिज्ञासाएं हों। इससे बच्चों में अगले दिन उन प्रश्नों के उत्तर जानने की उत्सुकता बनी रहती है, और सीखना उनके लिए केवल पढ़ाई न होकर एक रोमांचक अनुभव बन जाता है।

प्रार्थना सभा: सर्वांगीण विकास की नींव

विद्यालय में दिन की शुरुआत एक अत्यंत ऊर्जावान और प्रेरणादायक प्रार्थना सभा से होती है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव रखती है। राष्ट्रगान और प्रार्थना के साथ-साथ बच्चों को प्रेरणा गीत सुनाए जाते हैं, समाचार-पत्र का वाचन कराया जाता है, और पीटी व योग जैसी शारीरिक गतिविधियां कराई जाती हैं।

इस प्रार्थना सभा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें ही लगभग 90 प्रतिशत बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित हो जाती है। यह बच्चों का विद्यालय के प्रति जुड़ाव और उनके उत्साह का स्पष्ट प्रमाण है।

नवाचार से बढ़ा विद्यालय के प्रति आकर्षण

यद्यपि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या पहले भी अच्छी थी, लेकिन नए-नए नवाचारों और गतिविधि आधारित शिक्षण को अपनाने के बाद से नामांकन में और वृद्धि दर्ज की गई है। इस पद्धति ने न केवल बच्चों को सीखने के नए अवसर दिए हैं, बल्कि अभिभावकों में भी सरकारी विद्यालय के प्रति विश्वास और आकर्षण को कई गुना बढ़ाया है।

इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य केवल बेहतर शैक्षिक परिणाम प्राप्त करना नहीं है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, अनुशासन, रचनात्मकता और जीवन भर सीखने की आदत विकसित करना है।

शिक्षक: बच्चों के भविष्य के 'कुम्हार'

बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण को लेकर शिक्षिका का मानना है कि मासूम बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं। उन्हें शिक्षक रूपी कुम्हार जैसा आकार और संस्कार देगा, वे भविष्य में उसी रूप में ढल जाएंगे। आवश्यकता केवल इस बात की है कि शिक्षक धैर्य, प्रेम और सही दिशा के साथ बच्चों के भविष्य को सुंदर आकार दें।

उच्च प्राथमिक विद्यालय नैनाना जाट (कम्पोजिट) में इसी सोच को साकार करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक बच्चा उत्साह के साथ विद्यालय आए, रुचि के साथ सीखे और आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाए।

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