जिला अस्पताल बना जंग का मैदान, मेडिकल कराने पहुंचे आरोपी और पीड़ित पक्ष भिड़े
जिला अस्पताल बना जंग का मैदान, मेडिकल कराने पहुंचे आरोपी और पीड़ित पक्ष भिड़े
आगरा। थाना रकाबगंज क्षेत्र का जिला अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज से ज्यादा दो पक्षों के बीच कुश्ती के अखाड़े के रूप में चर्चा का विषय बन गया है। शनिवार को जब गुलाबगंज मामले से जुड़े लोग अपने घावों पर मरहम लगवाने यानी मेडिकल कराने पहुंचे, तो अस्पताल का पवित्र परिसर किसी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। विडंबना देखिए कि जिन हाथों में आपसी रंजिश के जख्मों का इलाज होना चाहिए था, वे एक-दूसरे का कॉलर पकड़ने और अस्पताल की दीवारों के बीच हाथापाई करने में व्यस्त नजर आए।
घटनाक्रम के मुताबिक, गुलाबगंज से जुड़े सात लोग अपनी-अपनी चोटों के चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अस्पताल के भीतर दाखिल हुए थे। दोनों पक्ष पहले से ही एक-दूसरे के खून के प्यासे घूम रहे थे, ऐसे में आमना-सामना होना तो तय था। जैसे ही मेडिकल प्रक्रिया शुरू हुई, पुरानी खुन्नस ने ऐसा विकराल रूप लिया कि देखते-देखते कागजी और मौखिक बहस ने लाइव एक्शन मूवी का रूप ले लिया। अस्पताल के सफेद कोट पहने डॉक्टरों और इलाज की आस में लाइन में खड़े बेबस मरीजों के सामने जब सरेआम लात-घूंसे चलने लगे, तो वहां भगदड़ जैसी स्थिति मच गई। जो मरीज अपनी बीमारी का दर्द लेकर अस्पताल आए थे, वे इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को देखकर अपना पुराना दर्द भूलकर जान बचाने को इधर-उधर भागते नजर आए।
सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी अस्पताल अब अखाड़े बन चुके हैं जहाँ सुरक्षा के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जाती हैं? अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए जो कोहराम मचा, उसने वहां मौजूद हर संवेदनशील इंसान को झकझोर कर रख दिया। लोग तमाशबीन बनकर इस कलयुगी महाभारत को निहारते रहे। काफी मशक्कत के बाद कुछ समझदार लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया, तब जाकर अस्पताल की सांसें वापस लौटीं। बहरहाल, पुलिस अब इस बात की तहकीकात करने में जुटी है कि आखिर अस्पताल के भीतर यह दंगल किस बात पर शुरू हुआ था, लेकिन इस पूरी घटना ने यह जरूर साबित कर दिया है कि इंसानियत और तहजीब अब अदालतों और अस्पतालों के बाहर ही दम तोड़ चुकी है।