दिल्ली में सियासी महारण! रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे और 'वोट चोरी' पर आर-पार की लड़ाई
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान रविवार को बड़े सियासी शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनने जा रहा है। चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने विशाल रैली का आह्वान किया है। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि रैली में लाखों लोग जुट सकते हैं। INDIA गठबंधन के कई बड़े नेताओं के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।
SIR पर छिड़ा सियासी संग्राम, 13 करोड़ नाम हटाने का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को माना जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत देशभर की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। विपक्षी दलों को आशंका है कि इस कवायद में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं। उनका दावा है कि इससे भाजपा को चुनावी फायदा पहुंच सकता है।वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अनुपलब्ध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। आयोग ने विपक्ष के राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा ने भी इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
CEC के खिलाफ 'प्रतीकात्मक महाभियोग', खड़गे के आवास पर जुटे विपक्षी नेता
रैली से एक दिन पहले शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्यवाही की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।इस दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयुक्त पर गंभीर सवाल उठाए। खड़गे ने उनके पद से हटाने की मांग वाला प्रतीकात्मक प्रस्ताव पेश किया, जिसे विपक्षी नेताओं ने समर्थन दिया।हालांकि, यह पूरी कार्यवाही केवल सांकेतिक थी। इसका कोई कानूनी या संवैधानिक प्रभाव नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
राहुल गांधी की अपील- लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस आंदोलन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताया है। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ-साथ छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से भी रैली में शामिल होने की अपील की है। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलों का विरोध नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा का अभियान है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लोगों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की।
विपक्ष और भाजपा आमने-सामने, बढ़ी सियासी तल्खी
इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने एक जनसभा में आरोप लगाया था कि कुछ लोग देश में अराजकता का माहौल बनाकर उन्हें बदनाम करना चाहते हैं। वहीं, भाजपा नेताओं ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक एजेंडा करार दिया है। उधर, कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब नहीं मिलता और मुख्य चुनाव आयुक्त जवाबदेही सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रैली को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। यातायात व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। आयोजकों को निर्धारित समय और सुरक्षा शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।