सोमवार की सुबह क्यों लगती है सबसे भारी? वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला मंडे ब्लूज़ (Monday Blues) के पीछे का चौंकाने वाला सच!

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Sunday की शाम ढलते ही क्या आपके दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगती हैं? क्या सोमवार की सुबह अलार्म की आवाज आपको दुनिया का सबसे खराब म्यूजिक लगती है? अगर हां, तो परेशान मत होइए, आप अकेले नहीं हैं। दुनिया के लगभग 80% कामकाजी लोग और स्टूडेंट्स इस समस्या से जूझते हैं, जिसे साइंस की भाषा में 'मंडे ब्लूज़' (Monday Blues) कहा जाता है।

अक्सर लोग इसे सिर्फ 'आलस' समझकर टाल देते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों और साइकोलॉजिस्ट्स ने रिसर्च में पाया है कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण है। आइए जानते हैं इसके पीछे के चौंकाने वाले फैक्ट्स:

1. बॉडी क्लॉक का बिगड़ना (Social Jetlag)

वैज्ञानिकों के अनुसार, मंडे ब्लूज़ का सबसे बड़ा कारण है 'सोशल जेटलैग'। जब हम पूरे हफ्ते सुबह जल्दी उठते हैं और वीकेंड (शनिवार-रविवार) आते ही देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से सोते हैं, तो हमारी बॉडी का सर्कैडियन रिदम (Circadian Rhythm) यानी इंटरनल बायोलॉजिकल क्लॉक पूरी तरह डिस्टर्ब हो जाता है। जब आप मंडे को अचानक फिर से पुराने रूटीन पर लौटते हैं, तो शरीर को एक झटका (Jetlag) लगता है, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।

2. अचानक बढ़ता है ब्लड प्रेशर (हार्ट अटैक का खतरा)

यह एक बेहद चौंकाने वाला फैक्ट है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की एक रिसर्च के मुताबिक, हफ्ते के बाकी दिनों की तुलना में सोमवार की सुबह लोगों में हार्ट अटैक के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि संडे के रिलैक्स मूड से अचानक मंडे के स्ट्रेसफुल और भागदौड़ वाले मूड में शिफ्ट होने के कारण शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) और एड्रिनलीन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल तेजी से बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है।

3. 'आदिवासी दिमाग' की थ्योरी (Evolutionary Psychology)

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानी दिमाग आज भी अपने पूर्वजों (आदिवासियों) की तरह सोचता है। इंसान स्वभाव से एक सामाजिक प्राणी है जो अपने 'कबीले' (परिवार और दोस्तों) के साथ सुरक्षित महसूस करता है। वीकेंड पर हम अपने इसी कबीले के साथ होते हैं। सोमवार को जब हम काम पर जाने के लिए निकलते हैं, तो हमारे अवचेतन मन (Subconscious Mind) को लगता है कि हम अपने सुरक्षित कबीले को छोड़कर फिर से 'शिकार' (काम/तनाव) पर जा रहे हैं, जिससे असुरक्षा और उदासी की भावना पैदा होती है।

4. चेहरे की झूठी मुस्कान

एक अन्य दिलचस्प स्टडी में सामने आया है कि सोमवार को लोग औसतन सुबह 11:15 बजे तक पहली बार मुस्कुराते हैं। यानी सोमवार की सुबह के शुरुआती 3-4 घंटे लोग बेहद गंभीर या चिड़चिड़े मूड में बिताते हैं और केवल काम के दबाव में ही दूसरों से बात करते हैं।

मंडे ब्लूज़ से कैसे निपटें? (Quick Tips)

स्लीप रूटीन न बदलें: वीकेंड पर भी सोने और उठने का समय बहुत ज्यादा न बदलें।

फ्राइडे को ही निपटा लें मंडे का काम: शुक्रवार की शाम को ही सोमवार की टू-डू लिस्ट (To-Do List) तैयार कर लें ताकि मंडे को जाते ही काम का बोझ न लगे।

मंडे को रखें कुछ एक्साइटिंग: सोमवार के दिन अपनी पसंद का खाना खाएं या शाम को किसी दोस्त से मिलने का प्लान बनाएं, ताकि दिमाग को एक पॉजिटिव मोटिवेशन मिले।

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