गाँव की माटी से निकलकर अपने दम पर युवाओं के धड़कन बने पंडित सहदेव शर्मा
पथौली की माटी से निकलकर बिना किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि के जिले के जननेता बने पंडित सहदेव शर्मा
- साजिशों को मात देकर सत्य की विजय से लेकर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष पद तक जानिए सहदेव शर्मा के संघर्ष की पूरी गाथा
- कार्यकर्ताओं की आवाज को प्रशासन के सामने पूरी मजबूती से बुलंद करने वाले बेहद बेबाक नेता सहदेव शर्मा
- जब तक जीवन है तब तक भाजपा के संकल्पों को समर्पित रहेगा जीवन युवाओं के चहेते पंडित सहदेव शर्मा का प्रखर विज़न
जब किसी व्यक्तित्व के भीतर समाज सेवा का सच्चा जज्बा और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा होती है तो वह बिना किसी राजनैतिक घराने की पृष्ठभूमि के भी अपनी मेहनत के बल पर शिखर तक पहुँच जाता है। आगरा के पथौली निवास करने वाले पंडित सहदेव शर्मा आज इसी जमीनी संघर्ष और जीवंत जुझारूपन की एक अनुपम मिसाल बन चुके हैं। एक साधारण गैर राजनैतिक परिवार से आने वाले सहदेव शर्मा का स्वभाव अत्यंत मिलनसार और सहज है परंतु जब बात कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन के सिद्धांतों की आती है तो उनकी छवि एक बेहद बेबाक और मुंह पर सच बोलने वाले निडर नेता की बन जाती है। अपनी इसी स्पष्टवादिता और कुशल कार्यशैली की वजह से वे आज आगरा जिले में प्रत्येक गांव में युवाओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं और बुजुर्गों का असीम स्नेह व आशीर्वाद हमेशा उनके साथ बना रहता है।
सह मीडिया प्रभारी से शुरू हुआ सांगठनिक सफर और संघर्ष के बीच सत्य की ऐतिहासिक विजय
पंडित सहदेव शर्मा के इस गौरवमयी राजनैतिक सफर की शुरुआत वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी के एक सामान्य सिपाही के रूप में हुई थी। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए तत्कालीन जिलाध्यक्ष अशोक राणा ने उन्हें जिला सह मीडिया प्रभारी और फिर मीडिया प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। इसके पश्चात युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सोनू चौधरी की टीम में वे जिला महामंत्री बने। ग्रामीण अंचल से निकलकर जब वे इस बड़े पद पर पहुँचे तो उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला परंतु राजनीति के कुछ अंतर्विरोधों के कारण उन्हें साजिश का शिकार भी होना पड़ा। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष को भ्रमित कर उन्हें उनके साथियों सहित पदमुक्त करा दिया गया था परंतु जैसा कि कहा जाता है कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं। अंततः सत्य की बड़ी विजय हुई और उन्हें पूरे सम्मान के साथ बहाल किया गया जिसमें अशोक राणा ऋषि उपाध्याय और प्रशांत पौनिया ने सत्य का साथ देकर उनकी बहुत बड़ी मदद की थी।
युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रूप में पहचान और पूरे जिले में कार्यकर्ताओं का जीवंत नेटवर्क
इस भयंकर सांगठनिक परीक्षा में खरे उतरने के बाद सहदेव शर्मा ने पूरी मेहनत और शिद्दत के साथ नेतृत्व के सम्मुख अपनी बात रखी जिसके फलस्वरूप पार्टी ने उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया। युवा मोर्चा के जिला मुखिया रहते हुए उन्होंने दिन रात एक करके पूरे जिले के कोने कोने में प्रवास किया और बड़े बड़े कार्यक्रमों का सफल संयोजन किया। इसी दौर में जिले के हजारों कार्यकर्ताओं के साथ उनका एक ऐसा आत्मीय और जीवंत संबंध स्थापित हुआ जो आज भी अटूट है। वे स्वयं बहुत ही गर्व के साथ स्वीकार करते हैं कि वे एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं और यदि भाजपा जैसी महान पार्टी उन्हें जनता की सेवा का यह अलौकिक अवसर नहीं देती तो इतनी व्यापक जन पहचान कभी संभव नहीं हो पाती। उनका संकल्प है कि जब तक उनके शरीर में सांस है उनका जीवन पूरी तरह भाजपा के सिद्धांतों के लिए ही समर्पित रहेगा।
जिला उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी और कार्यकर्ताओं की बात मजबूती से रखने की अद्भुत क्षमता
युवा मोर्चा के सफल कार्यकाल के बाद पार्टी ने उनकी सांगठनिक क्षमता का उपयोग मुख्यधारा की भाजपा में किया जहाँ उन्हें पहले जिला मंत्री और वर्तमान में जिला उपाध्यक्ष जैसी अत्यंत गरिमामयी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे चौबीसों घंटे केवल और केवल संगठन के कार्यों में रमे रहते हैं और कार्यकर्ताओं के सुख दुख में ढाल बनकर खड़े रहते हैं। प्रशासन में उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि जब भी किसी कार्यकर्ता के काम के लिए वे सिफारिश करते हैं तो बहुत ही दमदार और अधिकार के साथ अपनी बात रखते हैं जिससे हर काम आसानी से पूरा हो जाता है। अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण भले ही उनके विरोधी बने हों परंतु हर गांव में आज उनके वफादार साथियों की एक बहुत बड़ी फौज खड़ी है जो उनके एक आह्वान पर समाज सेवा के लिए तैयार रहती है।