सादगी की मिसाल सांगठनिक निष्ठा की धनी और सेवा को समर्पित डॉ सिमरन उपाध्याय

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राजनैतिक वैभव के बीच सादगी की अनूठी मिसाल! जानिए क्यों डॉ सिमरन उपाध्याय के सरल व्यक्तित्व का हर कोई है मुरीद

- संघ और विद्यार्थी परिषद के संस्कारों से सिंचित डॉ सिमरन उपाध्याय का संगठन से लेकर सेवा बस्तियों तक का पावन सफरनामा

- सेवा बस्तियों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर और सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ डॉ सिमरन उपाध्याय की ऐतिहासिक स्वास्थ्य क्रांति

- सिख और ब्राह्मण समाज के समन्वय की मजबूत कड़ी जानिए क्यों हर वर्ग के सुख दुख की सच्ची सारथी बनीं डॉ सिमरन उपाध्याय

राजनैतिक रसूख और ऊंचे प्रशासनिक ओहदों के बीच जब कोई व्यक्तित्व अपनी सहजता सादगी और निश्छल सेवा भाव को अक्षुण्ण बनाए रखता है तो वह समाज के लिए एक अनुपम प्रेरणा बन जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री की पुत्रवधू और एक अत्यंत प्रतिष्ठित राजनैतिक परिवार का हिस्सा होने के बाद भी डॉ सिमरन उपाध्याय के व्यवहार में अहंकार का तनिक भी लेश नहीं है। उनके सरल स्वभाव और अपनत्व की व्यवहार कुशलता का हर कोई मुरीद है। मूल रूप से मेरठ के वरिष्ठ एबीवीपी कार्यकर्ता सरदार मनमोहन सिंह वालिया के संस्कारों की छांव में पली बढ़ी डॉ सिमरन उपाध्याय का विवाह आगरा के डॉ वात्सल्य उपाध्याय के साथ हुआ। एक उच्च शिक्षित चिकित्सक होने के साथ ही बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के विचारों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पावन सांगठनिक पाठशाला से उनका बहुत ही गहरा और जीवंत नाता रहा है।

विद्यार्थी परिषद की प्रखर सिपाही और विभिन्न चुनावों में कुशल सांगठनिक कूटनीति

डॉ सिमरन उपाध्याय केवल नाम की ही कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और सक्रियता बहुत ही अनुकरणीय है। वे लगभग छह वर्षों से विद्यार्थी परिषद में एक बेहद सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी अमूल्य सेवाएं दे रही हैं और वर्तमान में वे एबीवीपी के मेडविज़न आयाम की ब्रज प्रांत प्रमुख के रूप में एक बहुत बड़ी सांगठनिक जिम्मेदारी को संभाल रही हैं। वर्ष 2021 और 2022 के चुनावों में मंडल समन्वयक और चिकित्सक समन्वयक के रूप में अपनी राजनैतिक कुशलता का परिचय देने के बाद वर्ष 2024 के आम चुनावों में भी उन्होंने आगरा मंडल के सभी चिकित्सकों को एक मंच पर लाकर संगठन के विचार को बहुत मजबूत किया। प्रसिद्ध कार्यक्रम जाणता राजा महानाट्य के आगरा आयोजन में महिला प्रमुख के रूप में उनकी प्रबंधकीय क्षमता और बजरंग दल के साथ मिलकर नशा मुक्ति हेतु 2400 युवाओं के भव्य मैराथन का सफल संयोजन उनकी अद्भुत नेतृत्व क्षमता को बयां करता है।

सेवा बस्तियों में स्वास्थ्य क्रांति और महिला उत्थान का भगीरथ संकल्प

डॉ सिमरन उपाध्याय ने समाज के वंचित तबके और विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य व कल्याण के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर रखा है। वे आयुष्मान सेवार्थ संस्था की अध्यक्ष के रूप में गांव और सेवा बस्तियों में अब तक 250 से अधिक निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का सफल आयोजन कर चुकी हैं जहाँ असहाय लोगों को मुफ्त दवाएं और जांच की सुविधाएं मिलती हैं। ब्रज प्रांत में महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता और निःशुल्क वैक्सीनेशन का उनका महाअभियान पूरे क्षेत्र में सराहा गया है। इसके अलावा बच्चियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए गुड टच बैड टच अभियान और महिलाओं के बीच सैनिटरी हाइजीन को लेकर वे निरंतर जमीनी स्तर पर सजगता बढ़ा रही हैं जिससे वे आज हर वर्ग की महिलाओं की सच्ची हमदर्द बनकर उभरी हैं।

सिख और ब्राह्मण समाज के बीच समन्वय की मजबूत कड़ी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

एक प्रखर और सुशिक्षित महिला नेत्री के रूप में डॉ सिमरन उपाध्याय सिख समाज और ब्राह्मण समाज दोनों के बीच आपसी सद्भाव और समन्वय की एक बहुत ही मजबूत व सुंदर कड़ी हैं। आगरा के प्रमुख गुरुद्वारा गुरु का ताल की कोर कमेटी की सम्मानित सदस्य हैं और पंजाबी व सिख समाज के प्रशासनिक व सामाजिक निर्णयों में अपनी प्रमुख भूमिका निभाती हैं। हर वर्ष प्रकाश पर्व पर विशाल जुलूस का आयोजन और आगरा में पहली बार इंटरनेशनल टर्बन डे का ऐतिहासिक आयोजन कराना उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अनुपम उदाहरण है। इसके साथ ही समर्थ गुरु रामदास व शिवराय प्रतिष्ठान के माध्यम से हर साल 17 अगस्त को गरुण झेप मुहिम के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापतियों के वंशजों के साथ आगरा से रायगढ़ तक मशाल यात्रा और लाल किले में वीर शिवाजी की गाथा की नाट्य प्रस्तुति कराना उनके जीवन के महान सांस्कृतिक और राष्ट्रीय संकल्पों को सिद्ध करता है।

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