लालटेन की रोशनी से पेरिस के रैंप तक: जब राहुल मिश्रा ने 'देवी' बनकर जीवंत कीं भारतीय मंदिरों की मूर्तियां

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उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास एक छोटे से गांव की तंग गलियों से निकलकर पेरिस के सबसे बड़े फैशन स्टेज तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारतीय फैशन इंडस्ट्री के गौरव, राहुल मिश्रा (Rahul Mishra) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच 'पेरिस हाउते कॉउचर वीक' (Paris Haute Couture Week) में इतिहास रच दिया है। राहुल का नया कलेक्शन 'देवी: द इटरनल म्यूज़' (Devi: The Eternal Muse) जैसे ही रैंप पर उतरा, पूरी दुनिया भारतीय शिल्प की मुरीद हो गई।

सफर: केरोसिन की लालटेन से 'वूलमार्क प्राइज' तक

राहुल मिश्रा का बचपन बेहद सीमित संसाधनों में बीता, जहाँ उन्होंने बिजली न होने पर केरोसिन की लालटेन (मिट्टी के तेल के दीये) की मद्धम रोशनी में बैठकर पढ़ाई की। लेकिन उनकी रचनात्मकता के आगे ये मुश्किलें छोटी साबित हुईं। उन्होंने 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन' (NID) से अपनी शिक्षा पूरी की और आगे चलकर प्रतिष्ठित 'अंतर्राष्ट्रीय वूलमार्क पुरस्कार' (International Woolmark Prize) जीतने वाले पहले भारतीय बनकर देश का नाम रोशन किया। पश्चिम के डिजाइन्स की अंधी नकल करने के बजाय राहुल ने हमेशा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अपनी यूएसपी (USP) बनाया।

जब रैंप पर उतरीं 'जीवंत मूर्तियां': कलेक्शन की 3 बड़ी बातें

पेरिस के ऐतिहासिक 'कॉलेज डेस बर्नार्डिन्स' (Collège des Bernardins) में जब मॉडल्स ने वॉक करना शुरू किया, तो वहां मौजूद दर्शकों की सांसें थम गईं। ऐसा लग रहा था मानो भारत के 2,000 साल पुराने प्राचीन मंदिर और अजंता-एलोरा की ऐतिहासिक मूर्तियां खुद जीवंत होकर रैंप पर चल रही हों। इस 'देवी' कलेक्शन की सबसे खास बातें ये रहीं:

शिल्पकला का अद्भुत 3D जादू: कपड़ों पर पारंपरिक ज़र्दोजी, डबका, मोतियों और क्रिस्टल्स का इस तरह इस्तेमाल किया गया था कि कपड़ों पर हूबहू मंदिरों की नक्काशी जैसा थ्री-डी (3D) प्रभाव दिखाई दे रहा था।

पत्थर जैसी जीवंत रंगत: प्राचीन मूर्तियों की बनावट और उनके पत्थरों का अहसास कराने के लिए कपड़ों में मुख्य रूप से ग्रे (गहरे सलेटी), ब्रॉन्ज़, आइवरी (हाथीदांत रंग) और चमकीले सोने (गोल्डन) के रंगों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया गया था।

फ्रंट रो में चमके ग्लोबल स्टार्स: राहुल मिश्रा के इस जादुई हुनर का दीदार करने के लिए शो की अगली कतार (Front Row) में रिलायंस रिटेल की डायरेक्टर ईशा अंबानी और मशहूर अमेरिकी रैपर कार्डी बी (Cardi B) जैसी वैश्विक हस्तियां मौजूद थीं।

कारीगरों को दिलाया अंतरराष्ट्रीय सम्मान

राहुल मिश्रा की यह अंतरराष्ट्रीय कामयाबी सिर्फ उनकी अकेले की नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनके 'कारीगरों' (Karigars) की वह फौज है जिन्हें राहुल सीधे भारत के सुदूर गांवों से उठाकर पेरिस के इस भव्य मंच तक ले गए। Brut India के माध्यम से राहुल ने अपनी इस बेहतरीन कारीगरी के जटिल विवरण और तकनीकों को दुनिया के सामने साझा भी किया है, जिसमें जर्दोजी और प्राकृतिक रत्नों को धागों के साथ कपड़ों में पिरोया गया है।

राहुल मिश्रा की यह कहानी सिर्फ कपड़ों या फैशन की नहीं है; यह कहानी भारतीय प्रतिभा, कड़े संघर्ष और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े रहकर दुनिया को जीतने की एक जीती-जागती मिसाल है।

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