यूपी में छिड़ा 'असली सनातनी' बनने का महासंग्राम: क्या 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के तीर से भाजपा के अभेद्य किले को भेद पाएगा सपा-कांग्रेस गठबंधन?

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उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर इस समय शह और मात का ऐसा खेल शुरू हुआ है, जिसने अच्छे-अच्छे राजनीतिक पंडितों के सिर घुमा दिए हैं! धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का झंडा बुलंद करने वाले विपक्षी दल अचानक गेरुए रंग में रंगने लगे हैं। 'पंचायत आजतक उत्तर प्रदेश' के मंच पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय के बयानों और समाजवादी पार्टी (सपा) की बदलती चाल ने साफ कर दिया है कि 2027 के दंगल से पहले, विपक्ष अब भाजपा को उसी की पिच (हिंदुत्व) पर धोबी पछाड़ देने की फिराक में है!

​सियासी गलियारों में सबसे बड़ा चटपटा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर रातों-रात कांग्रेस और सपा 'असली सनातनी' क्यों बनने चले हैं? क्या यह वाकई दिल का बदलाव है या फिर भाजपा का वोट बैंक खिसकाने का कोई नया चुनावी टोटका?

​अजय राय का तीखा बाण: "हम हैं असली सनातनी, भाजपा का खेल खत्म!"

​वाराणसी (बाबा विश्वनाथ की नगरी) से आने वाले कांग्रेस के सूबेदार अजय राय ने इस बार सीधे भाजपा के कोर एजेंडे पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। खुद को 'असली सनातनी' घोषित करते हुए अजय राय ने ललकारा:

​"हम बाबा भोले की नगरी के खांटी सनातनी हैं। जब ये लोग भगवान राम और बाबा विश्वनाथ के नाम पर छलावा करेंगे, तो हम चुप नहीं बैठेंगे! राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में जो घपलेबाजी की बातें सामने आ रही हैं, वह अब यूपी के गांव-गांव तक पहुंच चुकी हैं। यह कांग्रेस के चौतरफा दबाव का ही असर है कि इन्हें जांच का नाटक शुरू करना पड़ा।"

​सपा का 'मास्टरस्ट्रोक': परशुराम के जयकारे और ब्राह्मणों पर डोरे!

​उधर, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने भी अपनी पुरानी छवि के केंचुएल को उतार फेंका है। अब सपा के मंचों पर न केवल 'जय भीम-जय मीम' बल्कि भगवान परशुराम के गगनभेदी जयकारे भी गूंज रहे हैं।

​ब्राह्मण कार्ड से हलचल: भाजपा के सबसे वफादार माने जाने वाले ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सपा ताबड़तोड़ ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है।

​योगी-मौर्य का तगड़ा पलटवार: विपक्ष के इस नए 'सनातनी अवतार' को देखकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा का सीधा वार है कि विपक्ष का 'पीडीए' सिर्फ एक छलावा है, और यूपी का असली पिछड़ा-दलित समाज जानता है कि सच्चा सनातनी कौन है!

​क्यों मजबूरी बन गया विपक्ष का 'सॉफ्ट हिंदुत्व'?

​सपा और कांग्रेस के चाणक्यों को यह बात अच्छी तरह समझ आ चुकी है कि मोदी-योगी के 'प्रखर हिंदुत्व' के आगे सिर्फ मुस्लिम-यादव या जातिगत समीकरणों के सहारे जंग नहीं जीती जा सकती। इसलिए उन्होंने यह नई रणनीति बनाई है:

​भाजपा के 'हिंदू-विरोधी' ठप्पे को मिटाना: खुद को राम भक्त और शिव भक्त साबित करके विपक्ष भाजपा के उस सबसे बड़े हथियार को कुंद करना चाहता है, जिसके जरिए वोटों का ध्रुवीकरण होता है।

​चंदे और मैनेजमेंट पर घेराबंदी: धर्म का विरोध करने के बजाय, विपक्ष अब मंदिरों के प्रशासनिक रख-रखाव और स्थानीय मुद्दों को उठाकर जनता को यह संदेश दे रहा है कि 'धर्म हमारा भी है, लेकिन हम इसका व्यापार नहीं करते।'

​भीतर रार, बाहर प्यार: 2027 का क्लाइमेक्स होगा दिलचस्प!

​दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां सपा और कांग्रेस के बीच 403 सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरखाने शह-मात का खेल चालू है (जहां कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा सीटें झटकने के जुगाड़ में है), वहीं वैचारिक मोर्चे पर दोनों दल एक सुर में अलाप रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम का दावा है कि गठबंधन चट्टान की तरह मजबूत है और 2027 में भाजपा का तख्ता पलट कर रहेगा।

​अब देखना यह है कि यूपी की जनता विपक्ष के इस नए, चमचमाते 'सनातनी चोले' पर भरोसा करेगी, या फिर भाजपा का आजमाया हुआ 'राष्ट्रवाद और हार्डकोर हिंदुत्व' विपक्ष के इस 'सॉफ्ट मसाले' को फीका कर देगा? 2027 की लड़ाई वाकई देखने लायक होगी!

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