20 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन हटाया, सफदरजंग में भर्ती
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी एक बड़े आंदोलन को प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हटा दिया है। देश में शिक्षा सुधारों और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे विख्यात शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने एक नाटकीय घटनाक्रम में विरोध स्थल से जबरन हटा दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय के पुराने निर्देशों और उनके तेजी से गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए प्रशासन ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया है।
भीषण गर्मी के बीच केवल नमक और पानी के सहारे अनशन कर रहे 59 वर्षीय वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक, इस लंबे उपवास के कारण उनका वजन 9 किलो से अधिक कम हो गया है और वे बेहद दर्द से गुजर रहे थे। अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बंबा ने बताया कि वांगचुक फिलहाल पूरी तरह होश में और स्थिर हैं, लेकिन लंबे समय तक भूखे रहने के कारण शरीर में कमजोरी और हल्का डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) है, जिसकी निगरानी की जा रही है।
सुबह मचा हड़कंप, चादरों से ढका गया मंच
शनिवार सुबह लगभग 7:30 बजे जंतर-मंतर पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक दर्जनों पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल उस मंच पर जा पहुंचे जहाँ वांगचुक लेटे हुए थे। वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारियों ने जब पुलिस को रोकने का प्रयास किया, तो उन्हें बलपूर्वक हटा दिया गया। कार्रवाई को कैमरों से छिपाने के लिए मंच को चारों तरफ से चादरों के पर्दों से ढक दिया गया और कुछ ही मिनटों में एक एम्बुलेंस वांगचुक को लेकर अस्पताल रवाना हो गई।
इस कार्रवाई पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया (X) पर चिंता जाहिर करते हुए लिखा कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में रखा गया है। उन्होंने मांग की कि वांगचुक के परिवार और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत देख रहे निजी डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मौखिक या ड्रिप (IV) के जरिए कुछ भी न दिया जाए। वहीं पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह कदम अदालत के आदेश और मेडिकल सलाह के तहत केवल उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
अभिजीत दिपके ने संभाला मोर्चा, सोमवार को होगा संसद मार्च
प्रशासन को लगा था कि वांगचुक को हटाने से आंदोलन बिखर जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 'मुख्य न्यायिक परिषद' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक की जगह खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दिपके ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए बीबीसी को बताया कि जब वे सुबह एक दोस्त के घर गए थे, तब पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया था।
दिपके ने साफ किया है कि आंदोलन रुकने वाला नहीं है। आगामी 20 जुलाई (सोमवार) को प्रस्तावित भारत की संसद तक का शांतिपूर्ण मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही निकाला जाएगा। जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए वांगचुक ने भी पहले कहा था कि वे बाहर से कमजोर हैं पर अंदर से मजबूत हैं, और अगर मार्च से पहले उन्हें कुछ हो भी गया, तो उनकी आत्मा इस मार्च में शामिल होगी।
क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) आंदोलन?
यह पूरा आंदोलन मई महीने में देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं (जैसे NEET) में हुए पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन व्यंग्य (Satire) के रूप में शुरू हुआ था। खुद को 'तिलचट्टा' (कॉकरोच) कहने वाले इन युवा प्रदर्शनकारियों और छात्रों की मांग है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार किए जाएं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस संगठन और समर्थकों को 'विघटनकारी तत्वों की बी-टीम' कहकर खारिज कर दिया है, और सरकार की तरफ से अब तक वार्ता की कोई पहल नहीं हुई है। वांगचुक पर हुई इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों का गुस्सा भड़क गया है और अब उन्होंने शिक्षा मंत्री के साथ-साथ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है।
विपक्ष ने घेरा, केजरीवाल ने की मुलाकात
सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने के बाद देश में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। कई विपक्षी सांसदों ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे 'दमनकारी सरकारी हिंसा' और 'लोकतंत्र पर सीधा हमला' करार दिया है।
इससे पहले, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी विरोध स्थल पर जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। केजरीवाल ने युवाओं का समर्थन करते हुए सरकार से अपील की थी कि वे छात्रों की जायज मांगें सुनें। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए यह भी कहा था कि हर साल पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर उनकी जगह सोनम वांगचुक जैसे विजनरी को शिक्षा की कमान सौंप देनी चाहिए।