फतेहाबाद रोड पर उमड़ा भक्ति का सैलाब: आगरा के 'राजदेवम' में जया किशोरी जी की श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, 29 जुलाई तक बहेगी ज्ञान गंगा
ताजनगरी आगरा का वातावरण इन दिनों पूरी तरह से कृष्णमयी और भक्ति के अनूठे रंगों में रंगा नजर आ रहा है। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में 23 जुलाई से 29 जुलाई तक आयोजित हो रहे भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शानदार शुभारंभ हुआ। फतेहाबाद रोड स्थित 'राजदेवम' में आयोजित इस दिव्य आयोजन के पहले ही दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
व्यासपीठ से सुप्रसिद्ध कथा व्यास जया किशोरी जी ने भागवत महापुराण की महिमा और जीवन में सच्चे प्रेम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भागवत कथा जीवन बदलने का मार्ग: कथा व्यास जया किशोरी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल सुनने मात्र का ग्रंथ नहीं है, बल्कि इसे जीवन में उतारना ही ईश्वर प्राप्ति का सच्चा मार्ग है। भागवत कथा मनुष्य को सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर आत्मिक शांति की ओर ले जाती है।
निस्वार्थ प्रेम ही ईश्वर का रूप: उन्होंने प्रेम और समर्पण के गूढ़ रहस्यों को समझाते हुए कहा कि इस संसार में यदि कोई वस्तु सबसे अमूल्य है, तो वह 'निस्वार्थ और अटल प्रेम' ही है। सच्चा प्रेम किसी स्वार्थ का मोहताज नहीं होता, बल्कि वह तो प्रभु के प्रति निश्छल समर्पण की भावना है।
भजनों की सुरमयी सरिता में झूमे श्रद्धालु

जब जया किशोरी जी ने अपने सुमधुर स्वर में श्री कृष्ण और प्रभु भक्ति के भजनों की तान छेड़ी, तो 'राजदेवम' का पूरा भव्य पंडाल जयकारों से गूंज उठा। भजनों की जादुई धुन पर श्रद्धालु स्वयं को रोक न सके और भावविभोर होकर पंडाल में झूमने-नाचने लगे। चारों ओर 'जय श्री कृष्णा' और 'राधे-राधे' के पावन जयकारों की गूंज से पूरा माहौल अलौकिक ऊर्जा से भर गया।
"भागवत कथा प्रभु का साक्षात वांग्मय स्वरूप है। जब आप निश्छल भाव से हरि कथा का आश्रय लेते हैं और प्रभु की लीलाओं को हृदय में बसाते हैं, तभी जीवन के सभी संशय समाप्त होते हैं और वास्तविक आनंद की प्राप्ति होती है।"
— जया किशोरी जी
श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। फतेहाबाद रोड पर दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने कथा के पहले दिन व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया। प्रथम दिवस की कथा के समापन पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच दिव्य प्रसाद का वितरण हुआ।