बड़ी खबर: इनके कहने से धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, पढ़ें क्या बोले धर्मेंद्र
पत्र में बयां किया अपना दर्द
शिक्षा जगत में मचे घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले काफी समय से नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई अनियमितताओं और उसके बाद उपजे विवादों के कारण सरकार और मंत्रालय लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर थे। अंततः, इतनी फजीहत और बढ़ते दबाव के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को सौंप दिया है।
क्यों लिया इस्तीफा? पत्र में क्या बोले प्रधान?


धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र में साफ किया है कि यह फैसला उन्होंने देश के युवाओं के भविष्य और गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि 3 मई 2026 को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसे लेकर सरकार ने सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुचारू रूप से आयोजित करना रही है।
हालांकि, 16 जुलाई को घोषित परिणामों के बाद भी कुछ लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की गई, जिससे उनका मन व्यथित हुआ।
इस्तीफे के पीछे की असली वजह?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम का विशेष जिक्र किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर और देश भर में जो स्थितियां बनी हैं, उनका लाभ 'राष्ट्र विरोधी ताकतें' न उठा सकें, इसी चिंता में उन्होंने यह कदम उठाया है। प्रधान ने लिखा, "मैं नहीं चाहता कि भारत के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई पर लगाएं, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है"।
किसके कहने पर हुआ बड़ा फैसला?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि उन्हें प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और विश्वास के साथ कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हालांकि, सूत्रों का मानना है कि नीट विवाद के बाद जिस तरह से देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार की छवि पर सवाल उठे, उसके बाद से ही एक नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर और पार्टी आलाकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान ने अंत में कहा कि राष्ट्र सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी देश के युवाओं और ओडिसा की जनता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।