राहुल गांधी के आरोपों पर भड़की भाजपा, किरेन रिजिजू बोले— 'सबूत पेश करें या देश से माफी मांगें'

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नई दिल्ली: संसद के सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा एतराज जताया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के बयानों को पूरी तरह से निराधार और गैरजिम्मेदाराना करार दिया।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान गृह मंत्री के आदेश पर कार्रवाई की गई। राहुल गांधी ने सदन में कहा कि गृह मंत्री डरे हुए हैं और उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने तथा छर्रे (pellets) चलाने के आदेश दिए थे।

'आदेश की प्रति दिखाएं': किरेन रिजिजू का पलटवार

राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे असंसदीय और पद की गरिमा के खिलाफ बताया। रिजिजू ने चुनौती देते हुए कहा:

"गृह मंत्री का वह आदेश कहाँ है? राहुल गांधी सदन के समक्ष उस आदेश की प्रति प्रस्तुत करें और बताएं कि उन्हें यह जानकारी किसने दी? संसद में केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बिना जिम्मेदारी के कुछ भी नहीं बोला जा सकता।"

'कोई गोलीबारी नहीं हुई, झूठ बोल रहे हैं राहुल': पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी राहुल गांधी के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोलीबारी हुई ही नहीं थी, फिर भी विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं।

गोयल ने कहा कि राहुल गांधी विधेयक पर चर्चा करने के बजाय केवल निराधार बातें कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी को अपने झूठे आरोपों के लिए सदन और पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए तथा उनके बयानों को कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

सदन के रिकॉर्ड से हटाए गए असंसदीय शब्द

बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष से उन शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने का विनम्र अनुरोध किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विवादित अभिव्यक्ति को सदन की कार्यवाही (Record) से हटाने का आदेश जारी कर दिया।

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