कन्हैया की पैरवी कौन करेगा? सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐसा संकेत कि घूम गया पूरा केस!
मथुरा के चर्चित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में मुकदमों के प्रतिनिधित्व (Representation) को लेकर एक बड़ा मोड़ सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस बात का फैसला करने के लिए कि 'सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा', मामले को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज सकता है।
पीठ की टिप्पणी: दूसरे पक्षों को नोटिस दिए बिना लिया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरे पक्षों को नोटिस जारी किए बिना ही एक हिंदू पक्षकार को श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया था।
अदालत ने कहा:
"यह आवेदन किसी अन्य उद्देश्य के लिए था और अन्य सभी वादी पक्षों को नोटिस जारी नहीं किए गए थे। ऐसे में हम इस मुद्दे को वापस हाईकोर्ट में भेजना ही उचित समझते हैं।"
क्या है पूरा विवाद?
हिंदू पक्ष का दावा: मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया गया था।
20 से अधिक याचिकाएं: मथुरा की निचली अदालत में इस विवाद से जुड़े 20 से ज्यादा सिविल मुकदमे दाखिल किए गए थे, जिन्हें बाद में सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रतिनिधित्व विवाद: हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को एक आवेदन मंजूर करते हुए एक हिंदू पक्ष को सभी मुकदमों का 'प्रतिनिधि वाद' (Representative Suit) माना था, ताकि उस पर सबसे पहले सुनवाई हो सके।
इसी फैसले के खिलाफ दूसरे वादी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर अब सुनवाई चल रही है।
अगली सुनवाई 2 सितंबर को
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अनुरोध किया कि प्रतिनिधित्व के इस विवाद पर नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाए। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को तय की है।