आखिर ऐसा क्या हुआ? सिर्फ 1 मिनट चला सदन और अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई संसद!
संसद का मानसून सत्र अपने निर्धारित समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के अंतिम दिन भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच लोकसभा की कार्यवाही मात्र 1 मिनट और राज्यसभा की कार्यवाही लगभग 1 घंटे ही चल सकी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई शीर्ष नेता सदन में मौजूद रहे।
सत्र के अंतिम दिन का हाल
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी।
लोकसभा: सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण स्पीकर ने मात्र एक मिनट के भीतर ही सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
राज्यसभा: उच्च सदन में सभापति ने आवश्यक विधायी कार्य निपटाए और कुछ महत्वपूर्ण पटल पर रखे गए पत्रों को स्वीकार करने के बाद दोपहर तक कार्यवाही चलाकर इसे भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
सत्र के दौरान काम-काज का ब्योरा
पूरे मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश और पारित किया गया, हालांकि विपक्षी हंगामे के कारण कई मौकों पर सदन का कीमती समय भी नष्ट हुआ:
उत्पादकता (Productivity): इस सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कई अहम विधायी कार्य पूरे किए गए।
विधेयक पारित: सरकार ने वित्त विधेयक, केंद्रीय बजट पर चर्चा के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण संशोधनों और नए कानूनों को दोनों सदनों से मंजूरी दिलाई।
मुख्य मुद्दे: सत्र के दौरान विपक्ष ने नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, महंगाई, बेरोजगारी, राज्यों के वित्तीय आवंटन तथा देश की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
सत्तापक्ष और विपक्ष का रुख
संसदीय कार्य मंत्री का वक्तव्य: सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष का रवैया चर्चा में भाग लेने के बजाय केवल व्यवधान डालने का रहा। इसके बावजूद सरकार ने महत्वपूर्ण बजटीय प्रक्रियाओं और जनहित के विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की।
विपक्ष का आरोप: विपक्षी दलों और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने से बचती रही और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गई।
सत्र के समापन के बाद परंपरा के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने दोनों सदनों के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की और सत्र के सुचारू समापन पर औपचारिक बातचीत की।