सलाखों के पीछे भाई की कलाई पर राखी बांधते ही छलक पड़े बहनों के आंसू.....

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मथुरा। कारागार यानी जेल... जिसकी ऊंची-ऊंची दीवारों के पीछे एक ऐसी दुनिया बसती है, जहां की बैरकों में मौजूद बंदियों के दिलों में उदासी, मायूसी और अपने किए गए अपराध का पछतावा होता है। लेकिन जब इन गमगीन दीवारों के बीच अपनों से मिलने का कोई पावन पर्व आ जाए, तो दिलों में उमड़ती भावनाओं का ज्वार आंखों से आंसुओं का सैलाब बनकर बह निकलता है। रक्षाबंधन के इस पवित्र अवसर पर मथुरा जिला कारागार में कुछ ऐसा ही भावुक और झकझोर देने वाला मंज़र देखने को मिला।

दूर-दराज से पहुंचीं बहनें, बेताब थीं कलाई पर राखी सजाने को

रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर मथुरा जिला कारागार के बाहर सुबह से ही बहनों का तांता लगा हुआ था। न जाने किन-किन जिलों से बहनें अपने भाइयों से मिलने और उनकी सूनी कलाइयों पर राखी बांधने के लिए बेताब होकर इंतजार कर रही थीं। हर किसी की आंख में बस एक ही इंतजार था—वह पल जब वे अपने भाई से मिल सकें और राखी बांधकर उससे यह वचन ले सकें कि वह अनजाने में या भूलवश किए गए अपराधों से तौबा करके अपनी सही दुनिया और परिवार के पास वापस लौट आए।

जब भीड़ में अपनों को देख छलक पड़े आंसू

लंबी-लंबी लाइनों और तमाम प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद जब बहनों ने बंदियों की भीड़ के बीच अपने भाई को पहचाना, तो उनकी आंखें बरबस ही बरस पड़ीं। साथ आए मासूम बच्चों ने भी जब अपने मामा या भाई को सलाखों के पीछे देखा, तो वे भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और घंटों सुबकते रहे। अपनों का यह दर्द देखकर बंदी भाइयों की आंखें भी आंसुओं के सैलाब से भर गईं। भाई-बहन जब तक साथ बैठे, बस एक-दूसरे को निहारते और दुलारते रहे। कभी मिलने की खुशी तो कुछ ही पल बाद दोबारा बिछड़ने का डर... इन एहसासों के बीच सिर्फ और सिर्फ आंसू बहते रहे।

मुस्कुराते हुए बांधी राखी, पर बाहर आते ही टूट गए आंसू

बहनों ने बड़ी मुश्किलों से अपने आंसुओं को रोककर हिम्मत जुटाई और हंसी-खुशी अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। उनके साथ थोड़ा वक्त बिताया और हल्का-फुल्का हँसी-मज़ाक भी किया। लेकिन जैसे ही वे मुलाकात खत्म करके कारागार के गेट से बाहर आईं, वे अपने आंसुओं के बांध को रोक नहीं पाईं और फूट-फूटकर सुबकती हुई दिखाई दीं।

जेल प्रशासन का मानवीय प्रयास

इस पूरे संवेदनशील आयोजन को लेकर जिला कारागार अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने कहा कि त्यौहार हर किसी का मनना चाहिए। जेल प्रशासन की इस व्यवस्था से वहां मौजूद भाई-बहनों को घर जैसी अनुभूति हुई, जिसकी उन्होंने खुले दिल से सराहना की। रक्षाबंधन का यह दिन मथुरा जेल के कैदियों और उनकी बहनों के लिए एक ऐसा अनुभव छोड़ गया, जो जीवनभर उनके दिलों में याद रहेगा।

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