माँ की डांट से रूठकर निकली 17 वर्षीय छात्रा बनी दरिंदगी का शिकार, 47 किमी तक चला आतंक
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक अत्यंत झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। ग्रेटर नोएडा से नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए एक स्लीपर बस में बैठी 11वीं कक्षा की 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ चलती बस में चालक और कंडक्टर द्वारा सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और दावों की पोल खोल दी है।
कैसे शुरू हुई यह खौफनाक घटना?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली है। घटना के दिन वह अपनी माँ की डांट से नाराज होकर बिना किसी को बताए घर से नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए निकली थी। भारी बारिश और रात का अंधेरा होने के कारण वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई। वहाँ से गुजर रही एक खाली बस को देखकर उसने नोएडा जाने के बारे में पूछा, तो कंडक्टर ने बस में बैठने को कह दिया। लेकिन बस में चढ़ते ही उसकी जिंदगी का सबसे डरावना सफर शुरू हो गया।
47 किलोमीटर तक तमाशा बनी सुरक्षा
पीड़िता के अनुसार, बस में बैठने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। इसके बाद चालक और कंडक्टर दोनों ने मिलकर चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। परी चौक से लेकर कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर के लंबे सफर के दौरान यह खौफनाक खेल चलता रहा। बाद में आरोपी उसे कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में रिंग रोड के किनारे उतारकर फरार हो गए।
पीड़िता ने खुद पहुँचकर दर्ज कराई शिकायत, आरोपी गिरफ्तार
घटना के बाद सदमे में डूबी पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और खुद कश्मीरी गेट थाने पहुँची। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट ने बताया कि पुलिस ने बिना सीमा विवाद में उलझे तुरंत नए कानूनों के तहत मामला दर्ज किया और पीड़िता का मेडिकल कराया।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले और कुछ ही घंटों में बस की पहचान कर वजीराबाद पार्किंग से उसे जब्त कर लिया। साथ ही, दोनों आरोपियों—चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप—को तिमारपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। फोरेंसिक टीम ने बस के अंदर से चादर, कंबल और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद चाइल्ड कल्याण कमेटी के आदेश पर पीड़िता को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
सुरक्षा नियमों की उड़ी धज्जियाँ
इस घटना ने परिवहन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
बस की खिड़कियों पर गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिससे अंदर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
बस में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब और बंद पड़े थे।
निर्भया कांड के बाद बनाए गए सुरक्षा मानकों (जैसे पैनिक बटन, जीपीएस, और पुलिस सत्यापन) का बसों में पालन नहीं हो रहा था।
स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद 47 किमी के सफर के दौरान किसी की नजर इस पर न पड़ना सिस्टम की एक बड़ी चूक को दर्शाता है। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है।