साहित्य और सिनेमा के आईने में हुई राष्ट्रवाद पर चर्चा
आरबीएस कॉलेज के राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम में संपन्न हुई आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय संगोष्ठी
आगरा आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (चैप्टर आगरा) के तत्वावधान में आरबीएस कॉलेज के राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम में राष्ट्रवाद के विविध आयाम: साहित्य और सिनेमा के विशेष संदर्भ में विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. ज्योत्सना शर्मा द्वारा मां शारदे की वंदना और मधुर गायन के साथ हुई। कवि डॉ. यशोयश और डॉ. सौरभ देवा ने मंचासीन अतिथियों का शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. आशु रानी, एजीआई महासचिव प्रो. एस.एस. अवस्थी, युवराज अम्बरीश पाल सिंह, प्राचार्य प्रो. विजय श्रीवास्तव, प्रो. सुनीता रानी घोष, प्रो. राजेश कुमार, प्रो. प्रदीप श्रीधर, डॉ. युवराज सिंह और डॉ. मुकेश अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
साहित्य और सिनेमा देशभक्ति के सशक्त माध्यम: कुलपति प्रो. आशु रानी
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि साहित्य और सिनेमा ऐसे सशक्त माध्यम हैं जिनसे 'वसुधैव कुटुंबकम' की विचारधारा जन्म लेती है। देश का भविष्य संचालकों की राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ लेखकों और फिल्म निर्माताओं द्वारा परोसी जा रही सामग्री पर भी निर्भर करता है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. एस.एस. अवस्थी ने कहा कि राष्ट्रवाद हमारे हर उस कार्य में निहित है जो हम सकारात्मक सोच और मानव कल्याण के लिए करते हैं। अति विशिष्ट अतिथि युवराज अम्बरीश पाल सिंह ने कहा कि देश के प्रति प्रेम की निरंतरता को बनाए रखने का माध्यम साहित्य, संगीत या सिनेमा कुछ भी हो सकता है। मुख्य वक्ता प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि साहित्य और सिनेमा में राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखते हुए सांस्कृतिक सरोकार आज की महती आवश्यकता है।
कर्तव्यनिष्ठा और स्वदेशी अंतःकरण से बनेगा भारत विश्वगुरु
कार्यक्रम संरक्षक प्राचार्य प्रो. विजय श्रीवास्तव ने कहा कि कर्तव्य के प्रति निष्ठा, भाषा और संवादशैली भी राष्ट्रवाद का ही प्रतीक है। विशिष्ट वक्ता प्रो. सुनीता रानी घोष ने कहा कि विवेकानंद के भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए स्वदेशी अंतःकरण को पंख लगाने होंगे। डॉ. मुकेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति से ही हमारी पहचान है और सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना राष्ट्रप्रेम से ही संभव है। बीज वक्ता प्रो. राजेश कुमार ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज साहित्य में मौलिकता कम और महत्वाकांक्षा अधिक दिखाई दे रही है। द्वितीय सत्र में शोधपत्र संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें डॉ. राजेन्द्र मिलन, डॉ. सुषमा सिंह, रंजीत भदौरिया, डॉ. संदीप कुमार शर्मा, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. अंजली अवस्थी और श्रुति सिन्हा सहित कई विद्वानों ने अपने विचार रखे।
ओजपूर्ण संचालन और भव्य कवि सम्मेलन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. युवराज सिंह, श्रुति सिन्हा और सुशील सरित ने किया। संगोष्ठी के तृतीय सत्र में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें डॉ. शशि तिवारी, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. शशि गोयल, डॉ. यशोयश, अशोक गोयल, डॉ. अशोक अश्रु, दुर्ग विजय सिंह, डॉ. सुषमा सिंह, रमा वर्मा, रेखा कक्कड़, आभा चतुर्वेदी, यशोधरा यादव, हरीश भदौरिया और शोधार्थी ममता पाल ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से राष्ट्रवाद का अनुपम संदेश दिया। अंत में मीडिया प्रभारी एवं कवि डॉ. यशोयश ने सभी का आभार व्यक्त किया।