आगरा में पराली जलाने पर रोक लगाने को प्रशासन ने निकाले 3 जागरूकता रथ
आगरा। फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन व कृषि विभाग ने कमर कस ली है। शुक्रवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कैंप कार्यालय से 'फसल अवशेष प्रबंधन योजना 2026-27' के तहत 3 विशेष जागरूकता प्रचार वाहनों (जागरूकता रथ) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
केंद्र सरकार की "प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू" योजना के तहत ये प्रचार वाहन जिले की सभी तहसीलों एवं विकास खंडों में भ्रमण करेंगे। ऑडियो-विजुअल साधनों और लाउडस्पीकर से लैस ये वाहन किसानों को पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में आने वाली कमी तथा वायु प्रदूषण के गंभीर दुष्परिणामों से सचेत करेंगे। साथ ही, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और पराली बेलर जैसे अनुदानित कृषि यंत्रों व डी-कंपोजर (Decomposer) के उपयोग की जानकारी देंगे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि आने वाले महीने फसल अवशेष प्रबंधन के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील हैं। पराली जलाने से वातावरण में जहरीला धुआं फैलता है, जिससे जनस्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने जिले के सभी किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा— "फसल अवशेष न जलाएं, वैज्ञानिक तरीके से उनका प्रबंधन अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें।"
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पराली जलाना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। कृषि विभाग के अधिकारी लगातार गांवों में संवाद बनाकर किसानों को आधुनिक तकनीकों और पशु चारे के रूप में पराली के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगरा के किसान इसमें पूर्ण सहयोग देकर जिले को पराली मुक्त बनाएंगे। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार और जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।