कला, कलम और नवाचार की बही त्रिवेणी, उत्कर्ष का उमड़ा सागर

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ब्रज क्षेत्र के नवांकुर कलाकारों, फनकारों और साहित्यकारों को नया आकाश उपलब्ध कराने की पहल

आगरा। ब्रज की पावन धरा की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देने और नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से टीएनएफ टुडे समाचार पत्र (थॉट्स न्यूज़ फैक्ट्स टुडे) एवं कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (के.एम.आई.) हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय के संगम से केएमआई में कला, कलम और नवाचार की त्रिवेणी बही। कला जगत की बारीकियों, कलाकारों के संघर्ष और डिजिटल युग में संभावनाओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा की गई। अपने वर्षों के संघर्ष और गुरुजनों के मार्गनिर्देशन में मुकाम पर स्थापित फनकारों ने नवांकुरों को नसीहत दी कि सीखने की प्रक्रिया सतत रखनी होगी। कला में रातों-रात कामयाबी मुमकिन नहीं होती।अधूरे ज्ञान पर कभी इतराना नहीं। असफलता से घबराना नहीं। निरंतर अभ्यास से ही आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

इससे पहले केएमआई के सूर कक्ष में सांस्कृतिक संवाद की साप्ताहिक श्रृंखला 'कला मंथन' का शुभारंभ किया गया। आयोजन में आगरा और मथुरा के कलाकारों ने सहभागिता की। संवाद के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जीवन के हर पड़ाव पर सीखना बेहद जरूरी है, चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो। आज जब माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए संस्थान में भेजते हैं, तो वे 5 से 10 साल तक धैर्य रखते हैं, जिसके बाद कहीं जाकर अर्निंग (कमाई) शुरू होती है। लेकिन कला के क्षेत्र में अक्सर लोग चाहते हैं कि वे आज काम शुरू करें और कल से ही कमाना और मशहूर होना शुरू हो जाएं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कला साधना मांगती है और इसमें रातों-रात कामयाबी मुमकिन नहीं है, कलाकारों को हर कदम पर सीखते रहना होगा।

एक आर्टिस्ट का संघर्ष: मानसिक दबाव और वित्तीय चुनौतियाँ

चर्चा में कलाकारों के जमीनी संघर्ष को भी रेखांकित किया गया। एक आर्टिस्ट को अपने करियर में भारी मानसिक दबाव और खराब वित्तीय स्थितियों से गुजरना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, जब कोई कलाकार लगभग 10 गाने बनाता है, तब जाकर कहीं किसी एक गाने के हिट होने या उसे अच्छी रीच मिलने की उम्मीद होती है। इसके अलावा, चाहे कोई फिल्म हो या गाना, उसे बनाने के लिए एक बहुत बड़ी टीम और सामूहिक प्रयास की जरूरत होती है।

सोशल मीडिया: टैलेंट दिखाने का सशक्त माध्यम

डिजिटल क्रांति के इस दौर में सोशल मीडिया को उभरते हुए कलाकारों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म बताया गया। आज सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर का टैलेंट सामने आ रहा है और इंडस्ट्री के लोग वहीं से सीधे कलाकारों को हायर (नियुक्त) भी कर रहे हैं। अगर आपके अंदर सच्चा टैलेंट है, तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती। कलाकार अपने घर बैठे ही वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकते हैं, जहाँ दर्शक उन्हें न सिर्फ देखते और पसंद करते हैं, बल्कि आगे बढ़ने में मदद भी करते हैं।

बाहर नहीं, अपने ब्रज क्षेत्र का नाम बढ़ाएं कलाकार

मंच से स्थानीय कलाकारों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक बड़ा संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि हम बाहर जाकर सीखते हैं और वहीं काम करने लग जाते हैं, तो इसका मतलब है कि बाहरी लोग हमारे टैलेंट का फायदा उठा रहे हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य अपने ब्रज क्षेत्र का नाम रोशन करना होना चाहिए। कलाकार चाहे कहीं से भी सीखें, लेकिन अपनी कला का मुख्य प्रदर्शन और उपयोग अपने ब्रज क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए करें, यही कला का सही मायनों में सही उपयोग होगा।

सरकारी मदद और जानकारी के अभाव को दूर करेगा 'कला मंथन'

कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए टीएनएफ टुडे के संस्थापक और प्रधान संपादक धीरज शर्मा ने कहा कि सरकार फिल्मों और कलात्मक प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी तो देती है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में कभी-कभी यह पैसा गलत प्रोजेक्ट्स पर लग जाता है। इसी जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए टीएनएफ टुडे ने इस 'कला मंथन' की शुरुआत की है। इस मंच के माध्यम से अब हर सप्ताह बैठकें और चर्चाएं होंगी, जो कलाकारों का सही मार्गदर्शन करेंगी और इस बात का खाका तैयार करेंगी कि इस पूरे क्षेत्र को कला के मामले में कैसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।

केएमआई के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर के सहयोग से सूर कक्ष में आयोजित इस कला मंथन का प्रभावी संचालन किया सुप्रसिद्ध फिल्म लेखक व निर्देशक सूरज तिवारी ने। उन्होंने प्रतिभागियों के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। टीएनएफ टुडे समाचार पत्र के समाचार संपादक शंकर देव तिवारी ने युवा कला प्रेमियों को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में टीएनएफ टुडे समाचार पत्र के राजेश मिश्रा, विद्यापीठ के गणमान्य पदाधिकारी और भारी तादाद में कला, फिल्म, साहित्य क्षेत्र से जुड़े हस्ताक्षर उपस्थित रहे।

"आज सोशल मीडिया के इस दौर में कलाकारों के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के असीमित अवसर हैं, लेकिन मेरी सलाह यही है कि 'पहले सीखो, फिर कहो।' जब आप अपनी विधा को पूरी तरह सीखकर मंच पर आएंगे, तभी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने लिए नए और स्थायी रोज़गार के रास्ते खोल पाएंगे। इसके साथ ही, आज सरकार भी फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में बेहतरीन सब्सिडी दे रही है। इसके बावजूद हमारे बिजनेसमैन इस इंडस्ट्री पर फोकस नहीं कर रहे हैं, जिससे कई बार सही मार्गदर्शन न होने से वे गलत जगह पैसा लगा देते हैं। 'TNF Today' के इस 'कला मंथन' मंच को शुरू करने का हमारा मुख्य उद्देश्य यही है कि बिजनेसमैन और फाइनेंसर्स का पैसा सही टैलेंट पर लगे, उनका नुकसान न हो और कला जगत को बढ़ावा मिले।"

— सूरज तिवारी (फिल्म लेखक एवं निर्देशक)

आज 'TNF Today' द्वारा आयोजित इस 'कला मंथन' कार्यक्रम में मैं थोड़ा देर से जरूर पहुंचा, लेकिन यहाँ आते ही महसूस हुआ कि मैं किसी बेहद भव्य और अनूठे कार्यक्रम का हिस्सा बन गया हूँ। 'TNF Today' ने सचमुच एक बहुत ही शानदार आयोजन किया है। मैं विशेष रूप से सूरज तिवारी जी, राहत जहान जी और अनुप्रिया जी का धन्यवाद करना चाहूँगा। मैं इनके काम से शुरू से ही बहुत प्रभावित रहा हूँ। आज इस मंच पर कला जगत के इन सभी दिग्गजों को एक साथ देखना ऐसा था, मानो एक ही स्थान पर पूरी आकाशगंगा उतर आई हो। जब इतनी बड़ी प्रतिभाएं एक मंच पर विद्यमान हों, तो जाहिर है कि आने वाले समय में कला और संस्कृति के क्षेत्र में कुछ बहुत बड़ा और सकारात्मक काम होने जा रहा है।"

— अवधेश उपाध्याय (उद्यमी एवं समाजसेवी)

आज 'TNF Today' का जो यह 'कला मंथन' कार्यक्रम था, उसे मैं एक बेहद सकारात्मक नजरिए से देखता हूँ। कला के विविध रूप होते हैं, जिनमें काव्य लेखन और कहानी लेखन के साथ-साथ फिल्म भी कला और साहित्य का ही एक अभिन्न अंग है। हम कला और साहित्य को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देख सकते; साहित्य ही कला है और कला ही साहित्य है।

यहाँ आकर मैंने देखा कि लोगों में एक अद्भुत उत्साह है और वे कुछ नया करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें एक कुशल मार्गदर्शन की आवश्यकता है। मैं समझता हूँ कि 'TNF Today' के एडिटर-इन-चीफ धीरज जी ने इस जरूरत को समझा और एक बहुत ही शानदार मंच तैयार किया है। प्रत्येक शुक्रवार को होने वाली इन कार्यशालाओं के माध्यम से जब विचारों का मंथन और आदान-प्रदान होगा, तो कलाकारों की समस्याएं उभरकर सामने आएंगी और उनका समाधान भी निकलेगा। नवोदित (नए) कलाकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक बेहद सराहनीय और सार्थक प्रयास है।"

— रामेन्द्र शर्मा ' रवि ' (संस्थापक व अध्यक्ष, ब्रजभाषा काव्य मंच)

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