इसलिए बृजभूषण सिंह और योगी में शुरू हुई वर्चस्व की जंग

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पूर्वांचल की सियासत में 'बदलता मौसम' या 'ठहरा हुआ तूफान'?

किस करवट बैठेगी ठाकुर बनाम ठाकुर की जंग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा सबसे ज्यादा गर्म है—'ब्रजभूषण और योगी' के बीच की खामोश जंग। कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले इन दो कद्दावर ठाकुर नेताओं के बीच की तल्खी अब एक नए रहस्यमयी मोड़ पर खड़ी है।

सियासी पहेली: क्या मुलाकात के बाद बर्फ पिघली?

हाल ही में जब पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर दस्तक दी, तो सियासी जानकारों की भौहें तन गईं। करीब 25 मिनट की इस मुलाकात ने चर्चाओं के बाजार में आग लगा दी है। क्या यह महज एक शिष्टाचार भेंट थी या किसी बड़े समझौते की भूमिका?

गहराई से देखें तो कहानी कुछ और ही कहती है:

अतीत के घाव: दिसंबर 2022 का वह वाकया, जब योगी आदित्यनाथ ने ब्रजभूषण के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था, तब ब्रजभूषण ने तंज कसते हुए कहा था, "अब जब योगी खुद बुलाएंगे, तभी मिलने जाऊंगा।"

बदली हुई भाषा: अब, जब मुलाकात हो चुकी है, तब ब्रजभूषण इसे "परिवार के दो लोगों के गिले-शिकवे" का नाम दे रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रजभूषण की बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि उन्हें वह सब नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

कयासों का बाजार: क्या पक रही है खिचड़ी?

सूत्रों का कहना है कि पूर्वांचल की राजनीति में अपना वर्चस्व बनाए रखने की कवायद और आगामी पंचायत चुनावों में गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए यह 'मजबूरी' का मेल हो सकता है। वहीं, ब्रजभूषण का हनुमानगढ़ी मामले में योगी के दावे का समर्थन करना—कि वहां नमाज कभी नहीं पढ़ी गई—एक संकेत है कि वे अपनी राहों को फिर से मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

सियासी तंज:

क्या यह 'ठाकुर बनाम ठाकुर' का वर्चस्व है या भाजपा के भीतर की अनुशासन की अग्निपरीक्षा? ब्रजभूषण ने एक बार कहा था कि उनका मन योगी से मिलने का नहीं होता, लेकिन राजनीति की बिसात पर कभी-कभी दिल को पत्थर और मन को शांत रखना पड़ता है।

क्या सच में बदल गए समीकरण?

ब्रजभूषण के करीबी सूत्रों की मानें तो वे अब अपने परिवार के सियासी भविष्य को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'जीरो टॉलरेंस' रुख और ब्रजभूषण का विवादास्पद अतीत हमेशा से एक-दूसरे के समानांतर चलते रहे हैं।

ब्रजभूषण बनाम योगी का यह एपिसोड अभी खत्म नहीं हुआ है। यह एक ऐसी किताब है जिसका हर पन्ना एक नया मोड़ ले आता है। अब देखना यह है कि यह 'मिलन' केवल एक औपचारिक तस्वीर बनकर रह जाता है या आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा भूचाल लेकर आता है।

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