खेरागढ़ तहसील में किसानों का आंदोलन,भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के खिलाफ फूटा किसानों का गुस्सा
आगरा की खेरागढ़ तहसील में आज किसानों का आक्रोश सड़क पर उतर आया है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या है किसानों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी किसानों ने उपजिलाधिकारी (SDM) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की है। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
भ्रष्टाचार की जांच: कागारौल और खेरागढ़ बिजली विभाग में कथित तौर पर हो रहे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और किसानों को भेजे जा रहे फर्जी बिलों की निष्पक्ष जांच।
अधिकारों का हनन: किसानों और महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर तत्काल रोक।
बैंक उत्पीड़न: भूमि विकास बैंक और केनरा बैंक द्वारा किसानों के प्रति अपनाई जा रही दमनकारी नीतियों पर लगाम।
कालाबाजारी: निजी खाद-बीज दुकानदारों द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक पर सामान बेचने पर कार्रवाई।
सीबीआई जांच: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मामले की सीबीआई जांच की मांग।
प्रशासन को सीधी चेतावनी
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक शुरुआत है। धरना दे रहे नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 18 जुलाई 2026 तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो उसी दिन तहसील में आयोजित होने वाले 'संपूर्ण समाधान दिवस' का घेराव किया जाएगा। किसानों ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या हंगामे की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
इस आंदोलन में सपा के वरिष्ठ नेता दलेल सिंह सिकरवार, कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह सिकरवार, रमेश सिंह सिकरवार (एडवोकेट), राजेश गोस्वामी, शरीफ खान, कप्तान सिंह सिकरवार, और मुन्ना सिंह सहित कई अन्य किसान नेता और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे।