क्या टूटने की कगार पर है पाकिस्तान? PoK के गुस्से से कांपी इस्लामाबाद की हुकूमत
PoK में भड़का जनसैलाब: आज खत्म हो रहा अल्टीमेटम, 1.5 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर; क्या अवाम के आगे झुकेंगे सेना प्रमुख आसिम मुनीर?
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पिछले डेढ़ महीने से जारी जनाक्रोश अब अपने सबसे विस्फोटक मोड़ पर पहुँच गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रही 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना को दिया गया अल्टीमेटम आज (21 जुलाई) समाप्त हो रहा है। मुजफ्फराबाद मार्च की चेतावनी के बीच रावलकोट में भारी बारिश और गरज-चमक के बावजूद करीब 1.5 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं।
यदि आज इस्लामाबाद प्रशासन मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेता है, तो क्षेत्र में एक बार फिर हिंसक झड़पों और बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति ने पाकिस्तान के थलसेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की नींद उड़ा दी है।
हिंसा में अब तक 30 से ज्यादा मौतें, UN ने भी जताया कड़ा ऐतराज
PoK में यह आंदोलन 5 जून 2026 से जारी है। स्थानीय नागरिक, व्यापारी और सामाजिक संगठन बंद, हड़ताल और रैलियों के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
30 से अधिक मौतें: आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई में अब तक 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। अकेले 14 जुलाई को हुई भीषण झड़पों में 9 लोगों की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की चेतावनी: PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस्लामाबाद सरकार से हिंसा और मौतों की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने का आग्रह किया है।
महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक सुधारों की 'सीधी लड़ाई'
जो प्रदर्शन शुरुआत में बिजली के बिलों, आटे के दामों और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ था, वह अब पाकिस्तानी हुकूमत से अपने राजनीतिक हक छीनने की लड़ाई बन चुका है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
आरक्षित सीटों का खात्मा: PoK की स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जाए।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व: स्थानीय निवासियों को शासन-प्रशासन में अधिक और निष्पक्ष राजनीतिक अधिकार मिले।
नेताओं की रिहाई: आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नागरिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।
प्रशासनिक व आर्थिक सुधार: बिजली दरों में राहत, आर्थिक विषमता को दूर करने और बेहतर शासन व्यवस्था की गारंटी दी जाए।
4,000 से अधिक जवानों की तैनाती, मुजफ्फराबाद कूच की तैयारी
21 जुलाई की समयसीमा समाप्त होने के साथ ही प्रदर्शनकारियों ने राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की पूरी तैयारी कर ली है। स्थिति को हाथ से निकलता देख पाकिस्तान सरकार ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है।
रावलकोट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) और पुलिस के 4,000 से अधिक अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है।
रावलकोट में मौसम विभाग ने भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है, लेकिन आंदोलनकारियों के इरादे बुलंद हैं और वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं इस्लामाबाद के लिए धर्मसंकट
JAAC के अल्टीमेटम का आज अंतिम दिन होने के कारण पूरा पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर नज़र गड़ाए हुए है कि क्या शहबाज सरकार और जनरल आसिम मुनीर PoK की जनता के सामने घुटने टेकेंगे या बल प्रयोग का रास्ता चुनेंगे। अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकला, तो यह आंदोलन पाकिस्तान के लिए एक नए क्षेत्रीय संकट का कारण बन सकता है।