नेपाल में भीषण बाढ़ का तांडव: मृतकों की संख्या 788 पहुँची, 2500 से अधिक लोग अब भी लापता; राहत और बचाव कार्य जारी
पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
मुख्य अपडेट और राहत कार्य:
टनल में फंसे श्रमिकों की तलाश: नेपाल के जलविद्युत परियोजनाओं (विशेषकर त्रिशूली 3ए और 3बी साइटों) की सुरंगों में मलबे के बीच फंसे 100 से अधिक श्रमिकों को बचाने के लिए बचाव दल लगातार ड्रिलिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
सामूहिक अंतिम संस्कार: नेपाल के चितवन जिले में बड़ी संख्या में मिले अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने और मार्किंग करने के बाद देवघाट सामूहिक समाधि स्थल पर सामूहिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि परिजन बाद में उनकी पहचान कर सकें।
भारत की मदद: भारत सरकार की ओर से नेपाल को 68.5 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इसके अलावा, काठमांडू में भारत से पहुँची 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम डीएनए नमूनों के विश्लेषण में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही है। सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ और टनल एक्सपर्ट्स भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
भारतीय नागरिकों की स्थिति: विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन की सीमा के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुँचे 403 भारतीयों से संपर्क हो चुका है, जबकि लगभग 500 भारतीय अभी चीनी सीमा के भीतर सुरक्षित हैं। वहीं, असम, बिहार, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र के कई तीर्थयात्री व पर्यटक भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे थे, जिनमें से कई सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं, जबकि कुछ लोगों की तलाश जारी है।
नदियों का बढ़ता जलस्तर और नया खतरा: भोटेकोशी नदी में जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है और चीनी अधिकारियों ने तिब्बत सीमा के पास एक नई अस्थायी झील (बैरियर लेक) बनने की चेतावनी दी है, जिसके चलते नेपाल और भारत (विशेषकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और बिहार के सीमावर्ती इलाकों) में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। गंडकी प्रांत के गोरखा जिले में त्रिशूली नदी की बाढ़ में एक झूलता हुआ पुल भी बह गया है।