प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए नया नियम: अब किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं मिलेगी वसीयत व पावर ऑफ अटॉर्नी की कॉपी, जानिए क्या पड़ेगा असर
यदि आप संपत्ति (प्रॉपर्टी) खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो निबंधन विभाग (रजिस्ट्री ऑफिस) का नया फैसला आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। धोखाधड़ी, अवैध कब्जों और जमीन से जुड़े विवादों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। नए नियमों के तहत अब किसी भी वसीयत (Will) और पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) की प्रमाणित कॉपी (Certified Copy) किसी तीसरे व्यक्ति या बाहरी खरीदार को जारी नहीं की जाएगी।
विभाग के इस निर्णय से प्रॉपर्टी खरीदारों के सामने संपत्ति के पुराने कागजात और मालिकाना हक की जांच करने की चुनौती बढ़ गई है।
क्यों लागू किया गया यह नया नियम?
प्राइवेसी और सुरक्षा: निबंधन विभाग का मानना है कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोग अक्सर दूसरों की वसीयत या जीपीए (GPA) की प्रमाणित प्रति निकालकर उसका गलत इस्तेमाल करते हैं और जाली दस्तावेज तैयार कर लेते हैं।
दुरुपयोग पर रोक: बाहरी व्यक्तियों द्वारा दस्तावेजों का दुरुपयोग रोककर केवल मूल पक्षकारों की गोपनीयता (Privacy) बनाए रखना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।
अब किसे मिलेगी प्रमाणित कॉपी?
नियमों के अनुसार अब वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी की कॉपी केवल निम्नलिखित को ही दी जाएगी:
निष्पादक (Executant): जिसने वह दस्तावेज बनवाया या रजिस्टर कराया हो।
लाभार्थी/धारक: जिसके हक या नाम पर वह वसीयत/जीपीए बनाई गई हो।
कानूनी वारिस: संबंधित व्यक्ति के कानूनी उत्तराधिकारी।
खरीदारों के सामने क्या होंगी व्यावहारिक परेशानियां?
टाइटिल की जांच में अड़चन: पहले खरीदार या उनके वकील रजिस्ट्री ऑफिस में आवेदन देकर किसी भी प्रॉपर्टी के पिछले 30-40 साल का रिकॉर्ड (वसीयत/पावर ऑफ अटॉर्नी) निकालकर यह जांच लेते थे कि बेचने वाले का मालिकाना हक साफ है या नहीं। अब यह संभव नहीं होगा।
विक्रेता पर बढ़ेगी निर्भरता: अब खरीदारों को विक्रेता (Seller) से ही आधिकारिक कॉपियां मांगने के लिए कहना होगा, क्योंकि विभाग सीधे खरीदार को ये कागजात नहीं देगा।
विशेषज्ञों की राय और सलाह
कानूनी सलाहकारों का कहना है कि नए नियम के लागू होने के बाद प्रॉपर्टी का सौदा करते समय ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। अगर कोई संपत्ति वसीयत या पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर बेची जा रही है, तो खरीदारों को एडवांस भुगतान करने से पहले विक्रेता से ही निबंधन विभाग द्वारा जारी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की शर्त रखनी चाहिए।