संविदा बिजली कर्मचारियों का हल्ला बोल, मानदेय व पदों की कटौती के खिलाफ एक्सएन (EE) को सौंपा ज्ञापन
फतेहाबाद (आगरा)। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में कार्यरत निविदा एवं संविदा कर्मचारियों ने प्रबंधन की वादाखिलाफी और शोषण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। 'उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ' के तत्वावधान में संविदा कर्मचारियों ने प्रदेश संयुक्त मंत्री मोती सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को अधिशासी अभियंता (विद्युत वितरण खण्ड तृतीय, फतेहाबाद) को ज्ञापन सौंपकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रबंधन पर समझौते और आदेशों के उल्लंघन का आरोप
कर्मचारी संघ ने विद्युत निगम प्रबंधन पर अपने ही पूर्व आदेशों और लिखित समझौतों से मुकरने का गंभीर आरोप लगाया है:
मानकों की अनदेखी और स्टाफ की कमी:
संघ के अनुसार, 15 मई 2017 को जारी आदेश के तहत 33/11 केवी उपकेंद्रों के संचालन और रखरखाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 20 तथा शहरी क्षेत्रों में 36 कर्मचारियों का मानक तय किया गया था। लेकिन वर्तमान में निगम ग्रामीण उपकेंद्रों पर मात्र 12.5 और शहरी उपकेंद्रों पर केवल 18.5 कर्मचारी तैनात कर काम चला रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आधे स्टाफ के कारण उन पर अत्यधिक काम का दबाव है, जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है।
मानदेय बढ़ोतरी से मुकरने का आरोप:
कर्मचारियों का आरोप है कि 2 जुलाई 2026 को प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में प्रत्येक उपकेंद्र पर मानक के अनुसार कर्मचारी तैनात करने और संविदा कर्मियों का न्यूनतम मानदेय ₹18,000 करने पर सहमति बनी थी। हालांकि, अब तक इसे लागू न किए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
'मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा अनवरत धरना'
संघ के प्रदेश संयुक्त मंत्री मोती सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक निगम प्रबंधन उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक जिला एवं प्रदेश स्तर पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में मोती सिंह के साथ एबरन सिंह, योगेंद्र सिंह, बीरभान, नीतेश, बंटू, रवि, शैलेंद्र सहित बड़ी संख्या में संविदा विद्युत कर्मचारी उपस्थित रहे।