आगरा को बाल श्रम व बाल विवाह मुक्त बनाने में जुटे DM, समीक्षा बैठक में दिए सख्त आदेश

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मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल की अध्यक्षता में 'जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति' की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने आगरा जनपद को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त और बालश्रम मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों और स्टेकहोल्डर्स को कड़े निर्देश दिए।

चिह्नित बच्चों का रेस्क्यू, पुनर्वास और योजनाओं से आच्छादन

बैठक में देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों—जैसे निराश्रित, अनाथ, एकल अभिभावक वाले, भिक्षावृत्ति व बालश्रम में लिप्त, शिक्षा से वंचित और गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के चिह्नीकरण और पुनर्वास की समीक्षा की गई:

  • भिक्षावृत्ति और बालश्रम पर कार्रवाई: बैठक में बताया गया कि भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के तहत 8 बच्चों का रेस्क्यू किया गया है। वहीं, खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे 77 बाल/किशोर श्रमिकों का चिह्नीकरण किया गया है, जिनमें से 8 के खिलाफ परिवाद दाखिल किए जा चुके हैं और शेष को नोटिस जारी किए गए हैं।

  • बाल विवाह पर रोक: जिले में 4 बाल विवाह प्रकरणों में त्वरित कार्रवाई की गई है।

  • रजिस्टर और एसओपी (SOP): जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि ग्राम स्तर की समितियां, पुलिस और श्रम विभाग मिलकर चिह्नित बच्चों का ब्योरा रजिस्टर में दर्ज करें। साथ ही उनके रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाकर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।

स्थानीय समितियों का सशक्तिकरण और जन-जागरूकता

  • समितियों का गठन: ब्लॉक, ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के गठन और उनकी नियमित बैठकों की समीक्षा की गई।

  • जागरूकता अभियान: आमजन को जागरूक करने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर (1098), रेस्क्यू और पुनर्वास प्रक्रियाओं से जुड़े पोस्टर-पंपलेट लगाने के निर्देश दिए गए।

  • बाल संरक्षण गृहों का निरीक्षण: बाल देखरेख संस्थानों में रह रहे बच्चों के आवास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा मानकों और कौशल प्रशिक्षण का समय-समय पर निरीक्षण करने के आदेश दिए गए।

दत्तक ग्रहण, फॉस्टर केयर और पारिवारिक पुनर्मिलन पर जोर

बैठक के दौरान दत्तक ग्रहण (Adoption), स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, ग्रुप फॉस्टर केयर तथा आफ्टरकेयर योजनाओं की प्रगति जांची गई।

पारिवारिक पुनर्मिलन: केस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए संस्थागत देखरेख में रह रहे बच्चों के परिवारों का पता लगाकर उन्हें उनके परिवार से पुनर्मिलन कराने के प्रयासों पर बल दिया गया।

बाल कल्याण पुलिस अधिकारी: जनपद के सभी थानों में नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को नियमानुसार और बच्चों के सर्वोत्तम हित में कार्य करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्रीमती प्रतिभा सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) अतुल सोनी, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य सहित बाल संरक्षण इकाई (DCPU), किशोर न्याय बोर्ड और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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