नगर निगम का पानी, टैंकर भी अपने, फिर भी छिड़काव के नाम पर थमाया ₹68 लाख का बिल! आगरा में बड़े फर्जीवाड़े की आशंका
आगरा नगर निगम में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और सड़कों पर पानी के छिड़काव के नाम पर एक बड़ा वित्तीय खेल सामने आया है। नगर निगम के अपने पानी और अपने ही टैंकरों का इस्तेमाल होने के बावजूद एक बाहरी निजी फर्म को प्रति किलोमीटर के हिसाब से लाखों रुपये का भुगतान करने का मामला उजागर हुआ है। लेखा विभाग (Accounts Department) द्वारा 68 लाख रुपये के बिल पर आपत्ति जताए जाने के बाद इस पूरे करार पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है अजब-गजब करार का पूरा गणित?
वायु प्रदूषण नियंत्रण और डिवाइडर के पौधों को पानी देने के लिए नगर निगम ने दिल्ली-एनसीआर की 'जेके कंस्ट्रक्शन' (JK Construction) नामक फर्म से अनुबंध किया था:
निगम के 14 टैंकर: नगर निगम ने अपने 14 टैंकरों से छिड़काव के लिए फर्म को ₹209 प्रति किलोमीटर का भुगतान तय किया। फर्म को केवल ड्राइवर और सीएनजी (CNG) उपलब्ध कराना था।
कंपनी के 2 टैंकर: कंपनी द्वारा लगाए गए 2 निजी टैंकरों के लिए ₹290 प्रति किलोमीटर की दर तय की गई।
न्यूनतम 800 किमी का भुगतान: कागजों पर रोजाना 16 टैंकरों के जरिए शहर की 800 किलोमीटर लंबी सड़कों पर पानी छिड़कने का दावा किया गया।
कागजों में सड़कों पर बहा पानी, मौके पर सूखी पड़ीं सड़कें
आरोप है कि कागजी आंकड़ों में तो रोजाना 800 किलोमीटर सड़कें पानी से तर हो रही हैं, लेकिन धरातल पर मुख्य सड़कें सूखी पड़ी हैं।
इसके अलावा, शहर की प्रमुख सड़कों पर छिड़काव की जिम्मेदारी पहले से ही अन्य संस्थाओं के पास है:
मेट्रो कॉरिडोर (29.4 किमी): एमजी रोड, मॉल रोड, फतेहाबाद रोड और कैंट आदि क्षेत्रों में छिड़काव की जिम्मेदारी यूपीएमआरसी (UPMRC) की है।
सीएम ग्रिड व हाईवे: 12 किमी लंबी सीएम ग्रिड सड़कों पर ठेकेदार और नेशनल हाईवे पर एनएचएआई (NHAI) की जिम्मेदारी है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शहर की मुख्य सड़कों पर अन्य एजेंसियां छिड़काव कर रही हैं और तंग गलियों में टैंकर जा नहीं सकते, तो नगर निगम के टैंकर रोजाना 800 किलोमीटर कहां चल रहे हैं?
पार्षदों ने बताया घोटाला, जांच की मांग
पीपलमंडी पार्षद रवि माथुर: "नगर निगम अपने वाहन देकर केवल ड्राइवर के लिए इतनी मोटी रकम खर्च कर रहा है। अधिकारियों ने मनमाने तरीके से करार करके घोटाला किया है, इसे तुरंत निरस्त किया जाए।"
भाजपा उपनेता प्रकाश केसवानी: "यह फिजूलखर्ची और अजीबोगरीब करार है। निगम अपने ड्राइवरों से टैंकर चलवाए तो हर महीने लाखों की बचत होगी। हमने कहीं पानी का छिड़काव होते नहीं देखा।"
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य: "मामले की पूरी जानकारी ली जाएगी कि किस आधार पर यह करार किया गया था। इसके बाद ही जांच और आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा।"