"गुलाब जामुन से लेकर पहली मेहंदी तक": केएमआई, आगरा में भारतीय रंग में रंगी यूक्रेन की छात्राएं
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान संस्थान (केएमआई) में इन दिनों यूक्रेन की एक अनोखी छाप देखने को मिल रही है। यूक्रेन की 'तरास शेवचेन्को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ कीव' से आईं दो छात्राएं—दिआना नेचिपोरूक और कतेरीना कांतोर—स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 10 अगस्त से 27 अगस्त तक हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति की गहराइयों को समझ रही हैं। इस खास शैक्षणिक प्रवास के दौरान दोनों छात्राओं ने अपने दिलकश और मजेदार अनुभव साझा किए।
1. कतेरीना कांतोर: "यहाँ की वास्तुकला और लोगों का आत्मीय व्यवहार दिल जीत रहा है"

केएमआई में अध्ययन कर रहीं कतेरीना कांतोर ने भारत और यहाँ के माहौल को लेकर अपने दिल की बात खुलकर रखी। जब उनसे पूछा गया कि वह यहाँ कैसा महसूस कर रही हैं, तो उन्होंने बेहद सहजता से कहा कि यहाँ सब कुछ बहुत अच्छा है और वह काफी सहज महसूस कर रही हैं।
लोगों का आत्मीय स्वागत: कतेरीना ने आगरा के लोगों की तारीफ करते हुए बताया कि यहाँ के लोग बहुत अच्छे हैं और उन्होंने उनका बेहद प्यार से स्वागत किया है।

जिंदगी का पहला मेहंदी अनुभव: बातचीत के दौरान जब हाथों में मेहंदी लगवाने का जिक्र आया, तो वह उत्साह से भर उठीं और बताया कि उन्होंने पहली बार अपने हाथों पर मेहंदी लगवाई है, जो उन्हें बेहद खूबसूरत लगी।
पसंदीदा आकर्षण: कतेरीना को यहाँ की ऐतिहासिक वास्तुकला (Architecture) और लोगों का मिलनसार स्वभाव सबसे ज्यादा भाया है। उनके मुताबिक, इस संस्कृति के बीच रहकर हिंदी पढ़ना एक बेहद अनूठा और दिलचस्प अनुभव है।
2. दिआना नेचिपोरूक: "भारतीय खाना थोड़ा मसालेदार है, पर 'गुलाब जामुन' ने दिल चुरा लिया!"

यूक्रेन से ही आईं दूसरी छात्रा दिआना नेचिपोरूक ने भारतीय खान-पान, संस्कृति और अपने आध्यात्मिक लगाव पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने हँसते हुए स्वीकार किया कि उन्हें भारतीय भोजन से गहरा लगाव हो गया है।
चटपटे खाने से लेकर मीठे 'गुलाब जामुन' तक: दिआना ने मुस्कुराते हुए साझा किया, "भारतीय खाना हमारे लिए थोड़ा मसालेदार जरूर है, लेकिन यह बेहद स्वादिष्ट होता है। और आपकी मिठाइयाँ... जैसे 'गुलाब जामुन', वह तो वाकई दिल चुरा लेती हैं!"
देवी-देवताओं से अनोखा लगाव: भारतीय आस्था के प्रति अपनी जिज्ञासा जाहिर करते हुए उन्होंने बताया कि यहाँ के देवी-देवता उन्हें बहुत आकर्षित करते हैं। उनके पास अलग-अलग आकृतियाँ हैं, जिनमें उन्होंने गर्व से बताया कि उनके पास दो गणेश जी और एक छोटी शिव मूर्ति भी मौजूद है।

सीखे हुए प्यारे हिंदी शब्द: बातचीत के दौरान दिआना ने बड़े ही क्यूट अंदाज में अपने सीखे हुए कुछ हिंदी शब्द भी सुनाए, जैसे—'कविता', 'दीपक', 'पानी पीना' और 'खाना खाना'।
सेल्फी का क्रेज़ और सेलिब्रिटी वाला मज़ा: दिआना ने मुस्कुराते हुए बताया कि जब लोग उनके पास आकर उनके साथ सेल्फी क्लिक करवाते हैं, तो उन्हें यह पल बहुत पसंद आते हैं और इसमें बड़ा मज़ा आता है। स्थानीय लोगों का यह प्यार उन्हें एक अलग ही खुशी देता है।
सीखने की ललक: कीव यूनिवर्सिटी में हिंदी की पढ़ाई करने वाली दिआना ने बताया कि भले ही उनकी शिक्षिका किन्हीं कारणों से इस यात्रा में साथ नहीं आ पाईं, लेकिन वे दोनों खुद यहाँ आकर भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सीखने के लिए पूरी तरह उत्साहित हैं।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने इस पहल को 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा को साकार करने वाला बताया। उन्होंने कहा, "ऐसे कार्यक्रम शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे अनुभवात्मक और बहुआयामी बनाते हैं।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी इसी तरह देश-विदेश से जो लोग सीखने के लिए यहाँ आते रहेंगे, विश्वविद्यालय उन्हें उतने ही खुले दिल और आत्मीय भाव से स्वीकार करेगा और भारतीय संस्कृति व ज्ञान सिखाता रहेगा, क्योंकि यही हमारी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की सच्ची भावना है।
यह स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम न केवल दोनों छात्राओं के लिए एक शानदार ग्लोबल लर्निंग प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है, बल्कि भारत और यूक्रेन के बीच के सांस्कृतिक रिश्तों को भी एक नई और खूबसूरत उड़ान दे रहा है।